24 फरवरी का वो दिन दिनदहाड़े पवित्र संगम की नगरी प्रयागराज में उमेश पाल नाम के शख्स की माफिया अतीक के बेटे असद और उसकी गैंग ने हत्या कर दी गई जिसके बाद अब उनको अपने किए की सजा मिल रही है वो कहते हैं ना कि जैसे बोओगे वैसा ही काटोगे। माफिया अतीक के बेटे असद को गुरूवार को एनकाउंटर में ढेर कर के मिट्टी में मिली दिया गया और शनिवार को उसके शव को झांसी से प्रयागराज में लाया गया और कसारी मसारी कब्र में दफन कर दिया गया। असद के सुपुर्द-ए-खाक में पुलिस ने असद के 35 करीबी रिश्तेदारों को शामिल होने दिया, जिनमें नाना और मौसा शामिल रहे।
असद की मां शाइस्ता परवीन भी उसे देखने नहीं पहुंच पाई और अतीक ने भी असद के जनाजे में शामिल होने के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी और उस पर आज ही सुनवाई होनी थी। अपने बेटे को अंतिम बार भी अतीक और शाइस्ता नहीं देख पाए इससे बड़ी सज़ा उनके लिए नहीं हो सकती।
वहीं एनकाउंटर में ढेर हुए दूसरे अपराधी गुलाम के शव को प्रयागराज के मेहदौरी कब्रिस्तान में ले जाया गया और दफन किया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि जब असद का शव कसारी मसारी कब्र में दफन होने की तैयारियां हो रहीं थी तो उस बीच एक महिला असद के जनाजे में जाने के लिए अड़ी है, इसको लेकर पुलिस ने महिला से आईडी कार्ड मांगा लेकिन महिला ने कहा जनाज़े में शामिल होने के लिए आईडी का क्या मतलब बनता है।
माफिया अतीक की गुंडागर्दी ने आज उसके बेटे को बेटे को खाक में मिला दिया और एक बाप को अंतिम बार भी अपने बेटे का चेहरा देखने को नसीब नहीं हुआ। योगी ने सदन में पहले ही कहा था माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे और उन्होनें अतीक की सारी माफियागिरी को खाक में मिट्टी में मिला दिया। एक कहावत तो आपने सुनी होगी बच्चे का पहला स्कूल घर होता है जैसी सीख उसे घर से मिलती है वैसे ही वो ढलता है अगर शिक्षा अच्छी होती है तो इंसान सही राह पर चलता है और जीवन में सफलता हासिल करता है लेकिन असद के पिता अतीक माफियागिरी में शामिल था तो असद पर भी इसका असर आया और कलम पकड़ने की उम्र में उसने गोलियां थामी और पिता की तरह ही माफियागिरी में शामिल हो गया।

