U.P News: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार रात उस समय हंगामा मच गया जब भाजपा के दो विधायक मथुरा से राजेश चौधरी और वाराणसी से सौरभ श्रीवास्तव ,आपस में भिड़ गए। यह घटना उस वक्त हुई जब सदन में “विजन 2047” पर चर्चा चल रही थी और विधायकों को बोलने के लिए समय बांटा गया था।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
राजेश चौधरी का आरोप था कि उनका बोलने का समय (रात 9 बजे से 12 बजे तक का स्लॉट) छीन लिया गया, क्योंकि पहले से बोल रहे कुछ विधायक अपने भाषण को 11 बजे तक खींचते रहे। इससे चौधरी और पश्चिमी यूपी के कई अन्य विधायक बोलने से वंचित रह गए। उन्होंने खुलकर कहा—
“हमारा समय जानबूझकर रोका जा रहा है। सौरभ जी मेरा नाम आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।”
इस पर सौरभ श्रीवास्तव, जो उस समय चीफ़ व्हिप की जिम्मेदारी निभा रहे थे, भड़क गए और दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। चश्मदीद विधायकों के मुताबिक चौधरी अपनी सीट से उठकर आगे बढ़े और उनके सुर इतने आक्रामक थे कि कई सदस्य बीच-बचाव के लिए खड़े हो गए।
वायरल क्यों हुआ वीडियो?
इस घटना का वीडियो विधानसभा के कैमरों और मौजूद लोगों के मोबाइल से रिकॉर्ड हुआ। इसमें साफ दिख रहा है कि चौधरी गुस्से में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि श्रीवास्तव सीट पर बैठे हैं और जवाबी तर्क दे रहे हैं। अन्य विधायक दोनों को शांत कराने में जुटे दिखे।
वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, देखते ही देखते वायरल हो गया। दर्शकों ने इसे बार-बार शेयर किया और कहा—
“सत्तारूढ़ दल के भीतर ही ऐसी कड़वी नोंक-झोंक हो रही है, तो विपक्ष क्या कहेगा?”
अखिलेश यादव ने क्यों किया शेयर?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वीडियो को अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर शेयर किया। उन्होंने लिखा—
“भ्रष्ट आचरण और अभद्र भाषा ही भाजपा में तरक्की का ज़रिया है।”
उनके इस तंज के बाद मामला और गरमा गया।
राजेश चौधरी का पलटवार
अखिलेश यादव के बयान पर राजेश चौधरी ने सीधा पलटवार किया। उन्होंने कहा—
“अगर आपके अंदर ज़रा भी शर्म है तो उस मौलाना को जवाब दीजिए जिसने आपकी पत्नी और सपा सांसद डिंपल यादव का अपमान किया था। हम सब डिंपल जी के सम्मान के साथ खड़े हैं।”
यहां चौधरी का इशारा पिछले महीने टीवी डिबेट में दिए गए मौलाना साजिद राशिदी (ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष) के विवादित बयान की तरफ था, जिसमें उन्होंने डिंपल यादव के मस्जिद जाने पर टिप्पणी की थी।
जनता की राय
इस वीडियो को लेकर जनता की राय बंटी हुई है।
- कुछ लोग इसे भाजपा के अंदरूनी असंतोष की निशानी बता रहे हैं।
- कई लोगों का कहना है कि “विधानसभा जैसी जगह पर इस तरह की हरकत लोकतंत्र की गरिमा को गिराती है।”
- वहीं, कुछ समर्थक इसे “सदन के भीतर अपनी आवाज़ बुलंद करने का हक़” मानकर चौधरी का बचाव कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने लिखा
“अखिलेश यादव इस मौके का राजनीतिक फायदा उठा रहे हैं, लेकिन असल मुद्दा यह है कि भाजपा के भीतर संवाद और अनुशासन का संकट साफ दिख रहा है।”
हमारी इंटर्न सुनिधि सिंह द्वारा लिखित
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