खबर जनपद पीलीभीत से है जहां मृत व्यक्ति का इलाज व ठगी करने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव तिवारी ने आरोपित डॉक्टर योगेंद्र नाथ मिश्रा के खिलाफ आरोप सिद्ध न होने पर बरी कर दिया।
आपको बता दें तत्कालीन अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विजय बहादुर राम ने तीन अगस्त 2019 को थाना सुनगढ़ी में तहरीर दी थी, जिसमें कहा था कि डॉ. योगेंद्र नाथ मिश्रा ने पंडित मैकूलाल वीरेंद्र नाथ हॉस्पिटल का पंजीकरण कराया, जिसके साथ उन्होंने एमएस व एमसीएच की डिग्री यूनिवर्सिटी ऑफ सेशल्स द्वारा प्रदत्तएवं फेलोशिप इन न्यूरो सर्जरी का प्रमाण पत्र जो के ईएम हॉस्पिटल एण्ड सेठ जीएस मेडिकल कालेज परेल मुम्वई संलग्न किया। जाँच यह सर्टिफिकेट फर्जी पाया गया, इस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने पत्र जारी कर न्यूरो सर्जरी की सेवाओ पर रोक लगा दी थी।
दरसल मामला थाना पूरनपुर के ग्राम सकराना की शारदा देवी ने प्रार्थना पत्र में बताया था उसके पति राजू वर्मा (मृतक) के साथ 6 जून 2019 को दुर्घटना घटित हुई थी, जिनको रात्रि दो बजे पंडित मैकू लाल वीरेंद्र नाथ अस्पताल पीलीभीत में भर्ती कराया था, जहां डॉ. योगेंद्र नाथ ने बताया कि वह 72 घंटे बाद स्थिति बता सकेंगे।
इस दौरान भर्ती कर चालीस हजार रुपए जमा करा लिए सात जून को सुबह नौ बजे परिजन ने देखा कि उसकी दोनो आंखों पर टेप लगा था शक होने पर छुट्टी के लिए कहा पर अस्पताल प्रशासन ने मना कर दिया पर अगले दिन पति को हायर सेंटर का रेफर लेटर सौप दिया गया वहां से वे लोग एम्बुलेंस से पोस्टमार्टम हाउस गए पोस्टमार्टम में मृत्यु का समय 12 से 24 घंटे पूर्व होना अंकित किया गया आरोप था कि उसके पति की भर्ती काटने के लिए अस्पताल प्रशासन ने 60 हजार रुपए और कुल एक लाख रुपए की ठगी की गई।

