महादेव के केदार धाम के द्वार मंगलवार को प्रात: 6 बजकर 20 मिनट पर विधि-विधान से दर्शन के लिए खुल गये हैं। इसी दिन से चारधाम यात्रा अगले 6 महीने तक चलेगी। रावल भीमाशंकर लिंग तथा पुजारी शिवलिंग एवं धर्माचार्यों द्वारा पूजा अर्चना संपन्न की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी केदारनाथ में मौजूद हैं।
कपाट खुलते समय सेना के बैंड तथा भजन कीर्तन एवं जय श्री केदार के उदघोष से केदारनाथ धाम गुंजायमान रहा। कपाट खुलने के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देश पर तीर्थयात्रियों पर हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गयी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार बी.डी. सिंह को तीर्थयात्रियों पर पुष्प वर्षा का कार्यक्रम सफल बनाने हेतु शासन ने दायित्व सौंपा था इसी क्रम में बीते कल भगवान केदारनाथ जी की पंचमुखी डोली पर तथा तीर्थयात्रियों पर पुष्प वर्षा की गयी।
केदारनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ ही चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। मान्यता है कि यहां शीतकाल ऋतु में जब 6 महीने के लिए मंदिर के कपाट बंद होते हैं तो पुजारी मंदिर में एक दीपक जलाते हैं। आश्चर्य की बात ये है कि कड़ाके की ठंड में भी ये ज्योत ज्यो की त्यों रहती है और 6 महीने बाद जब यह मंदिर खोला जाता है तब यह दीपक जलता हुआ मिलता है। हर साल भैरव बाबा की पूजा के बाद ही मंदिर के कपाट बंद और खोले जाते हैं। कहते है कि मंदिर के पट बंद होने पर भगवान भैरव इस मंदिर की रक्षा करते हैं।
बीते 21 अप्रैल पंचकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से श्री केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंची थी। पंचमुखी डोली धाम प्रस्थान हेतु श्री विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी से 22 अप्रैल द्वितीय पड़ाव फाटा प्रस्थान पहुंची। 23 अप्रैल को देवडोली गौरीकुंड पहुंची थी।
बीते कल 24 अप्रैल शाम को पंचमुखी डोली श्री केदारनाथ धाम पहुंची। आज 25 अप्रैल प्रात: 6 बजकर 20 मिनट पर श्री केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं को दर्शन हेतु खोल दिये गये है संपूर्ण केदारनाथ धाम बर्फ से ढ़का हुआ है।

