आजकल बुजुर्ग लोगों का होना किसी धरोहर से कम नहीं होता है जिस घर में बुजुर्गों की मौजूदगी होती है उस घर में सुख, संतुष्टि और स्वाभिमान बना रहता है लेकिन आज के समय में हालात बदल रहें हैं। घर के सदस्य ही बुजुर्गों को सम्मान देने की बजाय उन्हें घर से निकालकर वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं नहीं तो घर में उनकी जिंदगी को नरक बनाकर उन्हें टॉर्चर करते हैं। एक ऐसा मामला सामने आया है हरियाणा से जहां ट्रेनी IAS ने अपने दादा-दादी के साथ इतना बुरा व्यवहार किया कि उन्होनें आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लिया।
बेटे के पास करोड़ो की संपत्ति लेकिन दो रोटी अपने दादा-दादी को खिलाने के लिए टॉर्चर करना। परेशान होकर दादा-दादी ने सुसाइड नोट लिखने के बाद सल्फास की गोलियां खा लीं। अस्पताल में इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। सुसाइड नोट में उन्होंने जिक्र किया था कि पोता आईएएस है और बेटे पर करोड़ों की संपत्ति है। फिर भी मुझे और मेरी पत्नी को खाना तक नहीं मिलता है।
मैं जगदीश चंद्र आर्य आपको अपना दुख सुनाता हूं। मेरे बेटे के पास बाढ़ड़ा में 30 करोड़ की संपत्ति है, लेकिन उसके पास मुझे देने के लिए दो वक्त की रोटी नहीं हैं। मैं अपने छोटे बेटे के पास रहता था, 6 साल पहले उसकी मौत हो गई। कुछ दिन उसकी पत्नी ने साथ रखा, लेकिन बाद में उसने गलत काम करना शुरू कर दिया। मैंने विरोध किया तो पीटकर घर से निकाल दिया।”
नोट में जगदीश चंद्र आर्य ने आगे लिखा, ”घर से निकाले जाने के बाद मैं दो साल तक अनाथ आश्रम में रहा। फिर वापस आया तो उन्होंने मकान को ताला लगा दिया। इस दौरान मेरी पत्नी लकवा का शिकार हो गई और हम दूसरे बेटे के पास रहने लगे. कुछ दिन बाद दूसरे बेटे ने भी साथ रखने से मना कर दिया और मुझे बासी खाना देना शुरू कर दिया है। ये मीठा जहर कितने दिन खाता, इसलिए मैंने सल्फास की गोली खा ली। मेरी मौत का कारण मेरी दो पुत्रवधू, एक बेटा और एक भतीजा है। जितने जुल्म उन चारों ने मेरे ऊपर किए, कोई भी संतान अपने माता-पिता पर न करे।”
जगदीश चंद्र आर्य नोट में लिखा है कि मेरी बात सुनने वालों से प्रार्थना है कि इतना जुल्म मां-बाप पर नहीं करना चाहिए। सरकार और समाज इनको दंड दे, तब जाकर मेरी आत्मा को शांति मिलेगी और मेरी बैंक में जो दो एफडी और बाढ़ड़ा में दुकान है, वो आर्य समाज बाढ़ड़ा को दे दी जाएं।

