महाराष्ट्र में फ़िलहाल सियासत काफी गरम हैं,शिंदे गुट और उद्धव गुट के बीच मानो घमासान मचा हुआ हैं,जिसके चलते पूरे महाराष्ट्र राज्य में मानो हल चल मच गयी हैं आपको बता दें की महाराष्ट्र रजनीतिक संकट मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की तरफ से फैसला सुनाया गया |
पूरा मामला क्या हैं
दरअसल पिछले साल जून में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 15 विधायकों के साथ मिलकर उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की थी इस बगावत के दौरान शिंदे के साथ शिवसेना के विधयाकों पहले सूरत और फिर गुवाहाटी में ठहरे थे जिसपर उद्धव ने सभी विधयाकों के साथ वापस आने और बैठकर बातचीत करने का प्रस्ताव भी दिया था लेकिन शिंदे गुट ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया बजाय इसके बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी इस दौरान राज्यपाल ने बीजेपी-शिंदे गठबंधन को मान्यता देकर शपथ दिला दी थी जिस पलटवार करते हुए उद्धव गुट ने एकनाथ शिंदे और उनके 15 विधायकों को अयोग्य करार देने के लिए याचिका दायर की थी. आपको बता दें की जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा तो इस मामले को संविधान पीठ में ट्रांसफर किया गया|
क्या बोला कोर्ट ने
दरअसल लम्बे समय के बाद उद्धव गुट की याचिका पर आज फैसला आ गया हैं आपको बता दें की इस फैसले के बाद उद्धव गुट को राहत मिली हैं इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा की हैं की विधायकों की अयोग्यता कोई फैसला नहीं होगा जिसके लिए उन्होंने स्पीकर को जल्द फैसला लेने का आदेश भी दिया हैं।, इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि व्हिप को पार्टी से अलग करना लोकतंत्र के हिसाब से सही नहीं होगा. पार्टी ही जनता से वोट मांगती है. सिर्फ विधायक तय नहीं कर सकते कि व्हिप कौन होगा. उद्धव ठाकरे को पार्टी विधायकों की बैठक में नेता माना गया था. 3 जुलाई को स्पीकर ने शिवसेना के नए व्हिप को मान्यता दे दी. इस तरह दो नेता और 2 व्हिप हो गए. स्पीकर को स्वतंत्र जांच कर फैसला लेना चाहिए था. गोगावले को व्हिप मान लेना गलत था क्योंकि इसकी नियुक्ति पार्टी करती है|
अगर उद्धव इस्तीफ़ा नहीं देते तो बनी रहती सरकार
आपको बता दें की सुप्रीम कोर्ट ने यह बताया की अगर उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा न दिया होता तो उद्धव सरकार के बहाल का आदेश हो सकता था और क्योंकि उद्धव ठाकरे ने फ्लोरल टेस्ट का सामना नहीं किया इसलिए उद्धव को बहाल भी नहीं किया जा सकता और इस पर फैसला महाराष्ट्र सरकार लें |

