लखनऊ- प्रदेश की राजधानी लखनऊ कहने को तो स्मार्ट सिटी बन गई है लेकिन हकीकत क्या है यह जनता जानती है राजधानी लखनऊ में जगह-जगह सीवर चोक हैं गंदगी का चारों तरफ हम मार लगा है कागजों पर हर दिन बड़े पैमाने पर साफ सफाई का अभियान चलाया जाता है सीवर सफाई व मेंटेनेंस के नाम पर लाखों का बंदरबांट किया जा रहा है जिसका नतीजा है कि राजधानी लखनऊ के कई इलाके सभी विषयों में बहते हुए सीवर व दुर्गंध से परेशान रहते हैं वहीं राजधानी के कई इलाके ऐसे हैं जहां पर सफाई व पूरा नहीं उठाया जाता है ऐसी ही राजधानी के अलग-अलग तस्वीरों से आपको रूबरू कराएंगे।
जनता से समय पर टैक्स वसूली बदले में मिलती है अव्यवस्था
आम जनता अगर समय पर जल कल वह हाउस टैक्स जमा करें विभाग घरों पर नोटिस चस्पा कर देता है यहां तक कि कह दिया जाता है कि अगर समय पर आपके द्वारा टैक्स का भुगतान नहीं किया गया तो कुर्की की कार्रवाई होगी जनता समय पर टैक्स जमा करती है बदले में जनता को सिर्फ मायूसी मिलती है हर वार्ड में सैकड़ों की तादाद में सफाई कर्मचारी तैनात किए गए ताकि जनता को साफ-सुथरी सड़क स्वच्छ वातावरण मुहैया कराया जा सके लेकिन हकीकत इसके विपरीत नजर आती है। सीवर सफाई व मेंटेनेंस के लिए एक हाईटेक स्वेज इंडिया प्राइवेट लिमटेड कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है बावजूद इसके राजधानी के हर वार्ड में सीवर की क्या स्थितियां हैं वह जगजाहिर है गर्मी हो बरसात हो या सर्दी का मौसम हर मौसम में सीवर उफान पर रहते हैं।
क्या ऐसे बनेगी स्वस्थ सुंदर राजधानी?
नगर निगम व जलकल विभाग मिलकर जनता की समस्याओं का निजात करने में विफल साबित होते नज़र आ रहे है।आज हम आपको राजधानी के शीतला देवी भवानी गंज हैदरगंज प्रथम द्वितीय तृतीय सहादतगंज दौलतगंज बालागंज कनैया माधौपुर प्रथम द्वितीय मातादीन रोड की वास्तविक स्थित ऐसी है कि गालियां चोक है पानी सड़क पर बह रहा है जनता की शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नही हो पा रही है।बालागंज निवासी नितिन गुप्ता बताते है कि डीएल लॉन से बालागंज तक पानी निकासी के लिए नाला वर्षों पूर्व बनाया गया था।जनता को लगा था अब समस्या का निदान हो जाएगा लेकिन नगर निगम की उदाशीनता का नतीजा यह है कि पूरा नाला चोक हो गया है जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।ऐसे में कैसे स्मार्टसिटी की कल्पना की जा सकती है।
ज़ोन6 में 15सौ से अधिक सफाई कर्मचारी
नगर निगम के जोन 6 में 15 सौ से अधिक सफाई कर्मचारियों की तैनाती सरकारी रजिस्टर में दर्ज है उसके बावजूद जून 6 में सफाई का आलम यह है कि जगह-जगह कूड़े का अंबार लगा हुआ है सीवर लीकेज है पानी सड़क पर बह रहा है बदबूदार पानी सड़क पर फैलने से सड़क से निकलने वाली जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है जनता बताती है कि सफाई कर्मचारी कभी कबार साफ सफाई करने आ जाते हैं अन्यथा सफाई होती ही नहीं है जिसका नतीजा है कि जगह-जगह कूड़ा जमा हो गया है पूरा जमा होने से कई बीमारियां फैलने की संभावनाएं बढ़ती जा रही है ऐसे में जनता का दर्द सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है जनता शिकायत करे तो करे कहां। सूत्रों के मुताबिक सफाई कर्मचारियों की जनसंख्या रजिस्टर में दर्ज है उसमें से आधे कर्मचारी ही मैदान में सफाई के लिए जाते हैं बाकी कर्मचारियों का बिना काम कराए ही भुगतान कराया जा रहा है ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारी कहीं ना कहीं उस पैसे का बंदरबांट करते हैं जिससे सफाई के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
जलकल विभाग भी सीवर सफाई व मेंटिनेंस के नाम पर कर रहा खानापूर्ति
सीएम जलकल राम कैलाश से कई बार राजधानी के अलग-अलग जोनों की सीवर सफाई व मेंटिनेंस के लिए शिकायत की जाती है शिकायत का संज्ञान लिया जाता है शिकायत स्थल पर कुछ कर्मियों को भेज कर खानापूर्ति करवा दी जाती है।जिसका आलम यह कि कुछ दिन बाद फिर उसी जगह पर पानी लीकेज व सीवर लीकेज की समस्या उभर आती है।ऐसे में जनता के टैक्स का दुरुपयोग कर कुछ जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी व प्राइवेट कंपनी अपनी जेभे भरने का काम कर रहे है।
डॉ सुनील कुमार रावत नही देते सफाई कर्मियों की सूची
राजधानी जैसे बड़े शहर की सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले डॉक्टर सुनील कुमार रावत से जब कार्यदाई संस्थाओं में कार्यरत कर्मियों की सूची मांगी जाती है तो गोल मोल जवाब देकर सूची उपलब्ध नही कराई जाती है।ऐसे में सवाल ये उठता है जिन सफाई कर्मियों के नाम पर भुगतान किया जा रहा है क्या वाकई में वह सफाई कर्मी काम करता है या सिर्फ लिस्ट में नाम दिखाकर भुगतान कराया जा रहा है।जिस प्राइवेट कंपनी के पास सफाई की जिम्मेदारी है उससे उसके फर्म के तहत कार्य करने वाले सफाई कर्मियों का ब्यौरा अगर नगर आयुक्त मंगवाकर जांच कराए की जितने सफाई कर्मियों के लखनऊ में सफाई का दावा किया जाता है कितने कर्मियों को भुगतान बैंक खातों में किया जाता है और कितना भुगतान किया जाता है वह कर्मी किस इलाके में सफाई का काम देखता है अगर ऐसी कोई जांच कराई जाए तो एक बड़े भ्रष्टाचार से पर्दा उठेगा और कई अधिकारी भी बेनकाब हो सकते है।
सफाई कर्मियों को दिए 7 हजार मोबाइल फोन व सिम का कुछ पता नही
लखनऊ में तैनात रहे पूर्व नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने सफाई की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सफाई कर्मचारियों को 7000 मोबाइल फोन सिम के साथ वितरित किए थे आज वह मोबाइल फोन सिम कहां है किसके पास है मोबाइल का क्या हुआ इसकी जानकारी कोई देने को तैयार नहीं है आखिरकार 7000 मोबाइल फोन वसीम कार्ड खरीदने में लाखों रुपए की बर्बादी क्यों की गई चीन सफाई कर्मचारियों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराया गया था उनसे मोबाइल फोन्स की जानकारी क्यों नहीं ली जा रही है यह एक बड़ा भ्रष्टाचार नगर निगम में पनप रहा है। 7000 मोबाइल फोन की विस्तृत जांच कराने की आवश्यकता है जो कि जनता के टैक्स से दिए गए पैसे से इन मोबाइल फोंस को खरीदा गया था ऐसे में नगर निगम की 7000 मोबाइल फोन की संपत्तियों का क्या हुआ जनता भी जानना चाहती है

