Satyam Trivedi crying: कानपुर के पनकी थाना क्षेत्र की एक घटना ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिस के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रतनपुर निवासी सत्यम त्रिवेदी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने भावुक होते हुए आरोप लगाए कि पनकी थाने के इंस्पेक्टर ने उन्हें न केवल थाने के भीतर जूतों से पीटा, बल्कि जातिसूचक गालियाँ भी दीं। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
घटना 25 अप्रैल की बताई जा रही है, जब सत्यम का अपने पड़ोसी के साथ नाली को लेकर विवाद हुआ। दोनों पक्ष पनकी थाने पहुँचे, जहाँ सत्यम के अनुसार उन्हें जमीन पर बैठा दिया गया जबकि विपक्षी पक्ष को कुर्सी दी गई। विरोध करने पर इंस्पेक्टर मानवेंद्र सिंह ने उन्हें जूतों से पीटा और जातिसूचक गालियाँ दीं। सत्यम ने बताया कि इस अपमान और मारपीट के बाद उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन 25 दिनों तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसके बाद मजबूरी में सत्यम ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और अपना दर्द एक वीडियो के माध्यम से साझा किया। इस वीडियो के वायरल होते ही मामला प्रकाश में आया और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया शुरू हुई।
अखिलेश यादव ने दी प्रतिक्रिया
सत्यम का वीडियो सामने आने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे ट्विटर (अब X) पर साझा किया और यूपी सरकार व प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, “सत्ता सजातीय की दबंगई का शिकार हो रहा है एक खास समाज, क्योंकि ‘हाता नहीं भाता।’” उन्होंने सत्यम को भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी न्याय के लिए उनके साथ खड़ी है।
इसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। सत्यम को कानपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय बुलाया गया और जांच की जिम्मेदारी ADCP पश्चिम को सौंपी गई है। हालांकि, सत्यम ने साफ शब्दों में कहा,“मेरी मान‑सम्मान की जो जूते से धज्जियाँ उड़ाई गईं, वह कोई जांच वापस नहीं ला सकती।”
पुलिस पर आरोप
इस घटना ने सिर्फ पुलिस की बर्बरता ही नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोपों को जन्म दिया है। सत्यम के अनुसार, उन्हें ‘जातिसूचक गालियाँ’ दी गईं — जो न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि यह भारत के संविधान के खिलाफ भी है। ऐसे में यह मामला सिर्फ थाने की चारदीवारी तक सीमित न रहकर, पूरे प्रशासन और समाज के तानेबाने पर प्रश्नचिन्ह बन गया है।
यह न्याय और समानता का सवाल है!
सत्यम त्रिवेदी की पिटाई और उनके साथ हुए व्यवहार ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि प्रशासनिक शक्तियाँ जब जवाबदेह नहीं होतीं, तो वे आम नागरिक की गरिमा को रौंद सकती हैं। यह घटना एक नागरिक की आत्मा को झकझोरने वाला उदाहरण है, जिसे सोशल मीडिया और राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना शायद कोई न सुनता। अब देखना ये है कि क्या जांच निष्पक्ष होती है और क्या सत्यम को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।
हमारी इंटर्न सुनिधि सिंह द्वारा लिखित
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