RSS Ram Madhav: आरएसएस (RSS) के वरिष्ठ नेता राम माधव ने साफ कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच मतभेद की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों संस्थाएं एक ही विचारधारा से जुड़ी हुई हैं और अपने-अपने क्षेत्र राजनीति और सामाजिक सेवा, में काम करते हुए राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगातार योगदान दे रही हैं। राम माधव ने कहा कि बीजेपी और संघ का संबंध केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि वैचारिक और पारिवारिक भी है, इसलिए मतभेद जैसी कोई बात नहीं उठती।
BJP और RSS
राम माधव ने एएनआई (ANI) को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि समय-समय पर यह अफवाहें फैलती हैं कि बीजेपी और आरएसएस के बीच दूरियां बढ़ रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि दोनों संगठनों का आधार और विचारधारा एक ही है। बीजेपी राजनीति के क्षेत्र में काम करती है, जबकि आरएसएस समाज सेवा और संगठनात्मक कार्यों के जरिए समाज को जोड़ने का काम करता है। दोनों का लक्ष्य केवल देश की प्रगति और विकास है।
विपक्ष के आरोप
यह बयान उस समय आया है जब विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण को लेकर निशाना साधा है। पीएम मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में आरएसएस की तारीफ की थी। इसके बाद कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने इसे संविधान और तिरंगे का अपमान करार दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राम माधव ने कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए संघ को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
“संघ में सभी का स्वागत है”
राम माधव ने यह भी कहा कि संघ में हर तरह की राजनीतिक विचारधारा रखने वाले लोग, यहां तक कि कांग्रेस से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से वे ही लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए संघ की आलोचना करते हैं।
प्रधानमंत्री के भाषण की तारीफ
राम माधव ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण की सराहना करते हुए कहा कि आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा संगठन के योगदान को स्वीकार करना संघ कार्यकर्ताओं के लिए गर्व की बात है। इसने संगठन में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया है।
Ram Madhav की मंशा क्या थी?
राम माधव के इस बयान का मकसद साफ है—
- विपक्ष के आरोपों को खारिज करना।
- यह संदेश देना कि आरएसएस और बीजेपी अलग नहीं, बल्कि एक ही वैचारिक धारा से निकले संगठन हैं।
- प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करके यह दिखाना कि सरकार और संगठन के बीच कोई दरार नहीं है।
- आने वाले चुनावों और राजनीतिक माहौल में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना।
एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में राम माधव ने यह स्पष्ट कर दिया कि आरएसएस और बीजेपी के बीच किसी प्रकार की दूरी या मतभेद नहीं है। दोनों संगठन अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए भी एक ही वैचारिक परिवार से जुड़े हैं और राष्ट्रहित ही उनका सबसे बड़ा लक्ष्य है।
हमारी इंटर्न सुनिधि सिंह द्वारा लिखित
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