Raja Kolander: लखनऊ की एडीजे कोर्ट ने एक सनसनीखेज फैसले में नरभक्षी राम निरंजन उर्फ राजा कोलंदर और उसके साथी बक्षराज को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह सजा वर्ष 2000 में पत्रकार मनोज सिंह और उनके ड्राइवर रवि श्रीवास्तव की नृशंस हत्या के लिए दी गई। हालांकि, यह मामला राजा कोलंदर की भयावह विरासत का केवल एक हिस्सा है, जिसका नाम उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुका है।
खून और बर्बरता का निशान
प्रयागराज के नैनी, शंकरगढ़ के हिनौता गांव का निवासी राजा कोलंदर, जिसे “नर पिशाच” कहा जाता है, ने अपनी क्रूरता से सभी को दहशत में डाल दिया। उसके खिलाफ 14 से अधिक हत्याओं के मामले दर्ज हैं। उसकी कार्यशैली इतनी भयानक थी कि वह अपने शिकार के शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर देता, अक्सर उनका सिर और गुप्तांग काट देता, और फिर उनके मस्तिष्क को उबालकर सूप बनाकर पी जाता। उसकी ये हरकतें, जो अत्यधिक हिंसा और मानव जीवन के प्रति भयावह उपेक्षा को दर्शाती थीं, जिसके वजह से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी।
14 दिसंबर, 2000 को पत्रकार धीरेंद्र सिंह और मनोज सिंह के शवों की बरामदगी ने उत्तर प्रदेश पुलिस को हिलाकर रख दिया। इस डबल मर्डर ने जांच को तेज कर दिया, और जल्द ही राजा कोलंदर का नाम सामने आया। गिरफ्तारी के बाद, उसने बिना किसी पछतावे के अपने अपराध कबूल कर लिए। उसने बताया कि धीरेंद्र सिंह को निशाना बनाया गया क्योंकि उनके भाई ने एक मामले में कोलंदर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
हत्या का खौफनाक मंजर
कोलंदर ने पुलिस को बताया कि उसने धीरेंद्र सिंह को अपने पिपरी फार्महाउस पर बुलाया। सर्दी का मौसम था, इसलिए अलाव जलाया गया था। धीरेंद्र और मनोज बाइक से पहुंचे और अलाव के पास बैठ गए। तभी कोलंदर के साले बक्षराज ने दोनों को गोली मार दी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद, कोलंदर और बक्षराज ने शवों को टाटा सूमो में डालकर मध्य प्रदेश की सीमा तक ले गए। वहां उन्होंने दोनों के सिर और गुप्तांग काट दिए। गुप्तांग और धड़ को खेत में दफना दिया गया, जबकि सिर को पन्नी में लपेटकर रीवा के बाणसागर तालाब में फेंक दिया गया।
डायरी जो बनी हत्याओं का सबूत
जांच के दौरान पुलिस को कोलंदर के घर से एक डायरी मिली, जिसने 14 हत्याओं का राज खोल दिया। डायरी के पन्नों ने पुलिस को सन्न कर दिया। पूछताछ में कोलंदर ने अपनी क्रूर कहानी बयां की। उसके फार्महाउस से अशोक कुमार, मुइन, संतोष और काली प्रसाद के नरमुंड बरामद हुए, जिनकी हत्या का जिक्र डायरी में था। उसने कुल 14 लोगों की हत्या की थी, और छोटी-छोटी बातों पर वह लोगों का खून कर देता था।
इस भयावह कहानी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर भी जगह बनाई, जहां कोलंदर पर आधारित एक वेब सीरीज, ‘इंडियन प्रिडेटर: द डायरी ऑफ अ सीरियल किलर’ रिलीज हुई।
अजीब सोच और हैवानियत
राजा कोलंदर (Raja Kolander) आर्डिनेंस फैक्ट्री में कर्मचारी था, लेकिन वह खुद को राजा ही मानता था। उसका कहना था कि जो उसे पसंद नहीं, उसे वह अपनी “अदालत” में सजा देता था। उसकी विचित्र सोच का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने अपनी पत्नी का नाम फूलन देवी और बेटों के नाम अदालत और जमानत रखे थे। उसकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य भी रह चुकी थी।
कोलंदर की हैवानियत का अंदाजा इस बात से लगता है कि उसने अपने साथी कर्मचारी काली प्रसाद श्रीवास्तव की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि वह कायस्थ बिरादरी का था। उसका मानना था कि कायस्थों का दिमाग तेज होता है। उसने काली प्रसाद की खोपड़ी के हिस्से को कई दिनों तक भूनकर खाया और मस्तिष्क को उबालकर सूप बनाकर पिया।
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