Rahul Gandhi: लोकसभा में संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर चर्चा के दौरान शनिवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा और वीर सावरकर को निशाने पर लिया। उन्होंने सदन में संविधान और मनुस्मृति का मुद्दा उठाते हुए सावरकर पर तीखी टिप्पणी की। इसके जवाब में समाजवादी पार्टी और शिवसेना के नेताओं ने राहुल गांधी पर पलटवार किया।
राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने सदन में संविधान और मनुस्मृति की प्रतियां लहराते हुए भाजपा पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता संविधान की जगह मनुस्मृति से देश चलाने की वकालत कर रहे हैं। वीर सावरकर पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा, “सावरकर ने अंग्रेजों से माफी मांगी थी, जबकि गांधी जी और नेहरू जी ने जेल की सजा काटी।”
सपा नेता आईपी सिंह का पलटवार
राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी नेता आईपी सिंह ने ट्वीट करते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया। आईपी सिंह ने लिखा, “कोई बहुत समझदार व्यक्ति ही वीर सावरकर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी के बारे में अभद्र भाषा बोल सकता है। सावरकर ने कालापानी की सेलुलर जेल में 9-10 वर्षों तक अमानवीय यातनाएं झेली।”
उन्होंने आगे कहा, “आज के नेता दो-चार मुकदमे झेलकर या कुछ महीने जेल काटकर शहीद बनने का दावा करते हैं। वीर सावरकर के बारे में गलत बोलने से पहले सौ बार सोचना चाहिए।”
आईपी सिंह ने अपने ट्वीट में इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए लिखा कि उन्होंने सावरकर को भारत का महान सपूत बताया था। उन्होंने जनता से अपील की कि वे पोर्ट ब्लेयर जाकर सेलुलर जेल और सावरकर की काल कोठरी को जरूर देखें।
शिवसेना नेता श्रीकांत शिंदे की प्रतिक्रिया
शिवसेना नेता श्रीकांत शिंदे ने भी राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने संविधान पर चर्चा की बजाय सावरकर पर टिप्पणी की। उन्होंने इंदिरा गांधी जी का पत्र तक नहीं पढ़ा, जिसमें उन्होंने सावरकर को सम्मानित किया था। जब मैंने राहुल गांधी को वह पत्र दिखाया, तो वह तिलमिला उठे।”
राहुल गांधी का जवाब
श्रीकांत शिंदे के आरोपों का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा, “सावरकर ने खुद कहा था कि भारत के संविधान में कुछ भी भारतीय नहीं है। उन्होंने अंग्रेजों को पत्र लिखकर माफी मांगी थी। इंदिरा गांधी ने भी मुझे बताया था कि सावरकर ने अंग्रेजों से समझौता कर लिया था।”
संविधान चर्चा में बदल गई सियासी लड़ाई
संविधान के 75 साल की यात्रा पर चर्चा के दौरान सावरकर पर आई बयानबाजी ने सदन में सियासी गर्मी बढ़ा दी। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार के बीच संविधान के मुद्दे पर चर्चा कहीं पीछे छूटती नजर आई।
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सावरकर पर उठे सवाल, लेकिन इतिहास के मायने अलग
वीर सावरकर के योगदान को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है। जहां भाजपा और सहयोगी दल उन्हें स्वतंत्रता संग्राम का महानायक बताते हैं, वहीं विपक्ष उनकी विचारधारा और अंग्रेजों को लिखी गई माफीनामे पर सवाल उठाता रहा है।

