Parliament Special Session : संसद का विशेष सत्र की घोषणा होते ही देश भर में लोगों ने तरह-तरह की अटकलें लगाना शुरू कर दी थी. हालांकि आज पीएम मोदी को संबोधित किया साथ ही उन्होंने संसद में भी अपना संबोधन दिया पर बावजूद इसके इस बात का ठीक-ठीक अंदाजा नहीं लग पाया कि विशेष सत्र का उद्देश्य क्या है. शाम को आज कैबिनेट की बैठक भी हुई, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चली.
सोमवार को विशेष बैठक के पहले दिन संसद बुलाई गई. सदन की कार्यवाही पुराने भवन में चली. हालांकि, कल से संसद के सत्र नए भवन में आयोजित किए जाएंगे. विशेष सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने 1950 में संविधान के निर्माण और उसे अपनाने से लेकर अनुच्छेद 370 को निरस्त करने तक की संसद की यात्रा का जिक्र किया.
उन्होंने यह भी कहा कि देश के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रतिष्ठित “ट्रिस्ट विद डेस्टिनी” भाषण की गूंज हमेशा गूंजती रहेगी और भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. उन्होंने यह भी कहा कि संसद का विशेष सत्र भले ही छोटा हो, लेकिन ऐतिहासिक फैसलों के लिहाज से इसका बहुत महत्व है.
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जबकि सत्र के दौरान लगभग आठ विधेयकों पर विचार और पारित होने की संभावना है, प्रधान मंत्री के ऐतिहासिक निर्णयों के संकेत ने सत्र के वास्तविक उद्देश्य पर अटकलों को जन्म दिया है. जबकि सत्र के दौरान लगभग आठ विधेयकों पर विचार और पारित होने की संभावना है, प्रधान मंत्री के ऐतिहासिक निर्णयों के संकेत ने सत्र के वास्तविक उद्देश्य पर अटकलों को जन्म दिया है.
पांच दिवसीय विशेष सत्र शुरू होने से पहले संसद के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, यह छोटा सत्र हो सकता है, लेकिन ऐतिहासिक फैसलों के लिहाज से इसका बहुत महत्व है. यह भारत के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है. 75 साल का सफर. 75 साल का सफर जिस मुकाम पर पहुंचा वो बहुत प्रेरणादायक पल था और अब उस सफर को आगे बढ़ाते हुए हमें नए संकल्प, नई ऊर्जा, नए विश्वास के साथ 2047 में इस देश को एक विकसित देश बनाना है.

