Parliament Session: ग्रामीण रोजगार से जुड़े जी-राम-जी (G-RAM-G) कानून को लेकर बुधवार को लोकसभा का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर जल्दबाजी में कानून पारित कराने का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे ग्रामीण भारत के भविष्य से जुड़ा अहम सुधार बताया। बहस के अंतिम क्षणों में कुछ विपक्षी सांसदों द्वारा दस्तावेज फाड़े जाने से राजनीतिक टकराव और तीखा हो गया।
शोर-शराबे के बीच ध्वनिमत से मंजूरी
लगातार नारेबाजी और आपत्तियों के बावजूद विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) से जुड़ा यह विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह कानून पुराने मनरेगा ढांचे की जगह लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे रोजगार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाया जाएगा।
सदन में बढ़ा तनाव, कार्रवाई पर सवाल
जब मंत्री सरकार का पक्ष रख रहे थे, उसी दौरान विपक्षी सांसदों ने विरोध दर्ज कराते हुए बिल की प्रतियां फाड़ दीं। इससे सदन में कुछ देर के लिए अव्यवस्था जैसी स्थिति बन गई। अध्यक्ष को हस्तक्षेप कर व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
सरकार बोली— यह सुधार है, विवाद नहीं
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन मर्यादाओं का पालन भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान भी रखा गया है।
नए कानून की प्रमुख बातें
सरकार के अनुसार, जी-राम-जी योजना के तहत
- काम के दिनों की गारंटी को बढ़ाया जाएगा
- मजदूरी भुगतान की समय-सीमा तय होगी
- गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर जोर रहेगा
- रोजगार सृजन को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ा गया है
विपक्ष का आरोप— नाम बदला, भावना बदली
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाकर इसकी मूल भावना को कमजोर किया गया है। उनका आरोप है कि सरकार ने व्यापक चर्चा के बिना कानून पारित किया और इसे संयुक्त संसदीय समिति को भेजना चाहिए था।
सपा-वाम दलों ने भी जताई आपत्ति
समाजवादी पार्टी और वाम दलों ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि वैचारिक है। उनका दावा है कि इससे ग्रामीण गरीबों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और केंद्र सरकार राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
भाजपा का जवाब— नाम नहीं, काम अहम
भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि योजनाओं की सफलता नाम से नहीं, बल्कि उनके प्रभाव से तय होती है। पार्टी का दावा है कि नया कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।
अब राज्यसभा की बारी
लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह वहां भी विरोध दर्ज कराएगा, जबकि सरकार इसे सुधारात्मक कदम बताते हुए पूरी मजबूती से आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
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