भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में इस साल पंचकोशी यात्रा 15 अप्रैल से प्रारंभ होगी तथा 19 अप्रैल को इसका समापन होगा। पंचकोशी यात्रा में उज्जैन, इंदौर एवं अन्य संभाग के हजारों यात्री भाग लेते हैं। इस 118 किलोमीटर लंबी यात्रा में कई श्रद्धालु नंगे पांव चलकर ईश्वर आराधना करते हैं। पंचकोशी यात्रा के आयोजन के लिए प्रशासन द्वारा अभी से तैयारियां प्रारंभ कर दी गई है।
कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने इस सम्बन्ध में सोमवार को बैठक लेकर विभिन्न विभागों को दिशा-निर्देश दिये। बैठक में अपर कलेक्टर मृणाल मीना, जिला पंचायत सीईओ अंकिता धाकरे, एडीएम अनुकूल जैन, संयुक्त कलेक्टर गरिमा रावत, एसडीएम राकेश शर्मा, कल्याणी पाण्डे, संजीव साहू एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
बता दें कि ऐसी मान्यता है कि पंचक्रोशी यात्रा अनादिकाल से प्रचलित थी, जिसे राजा विक्रमादित्य ने प्रोत्साहित कर 14वीं शताब्दी से शुरू किया था जो कि अब तक चली आ रही है। स्कंदपुराण के अनुसार अनन्तकाल तक काशीवास की अपेक्षा वैशाख मास में मात्र पांच दिवस अवंतिवास का पुण्य फल अधिक है।
वैसाख कृष्ण दशमी पर शिप्रा स्नान व नागचंद्रेश्वर पूजन के बाद यात्रा शुरू होती है, जो 118 किमी की परिक्रमा करने के बाद कर्क तीर्थवास में खत्म होती है और तुरंत अष्टतीर्थ यात्रा शुरू होकर वैशाखा कृष्ण अमावस्या को शिप्रा स्नान के बाद पंचक्रोशी यात्रा का समापन होता है।

