Operation Sindoor: भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी मुहिम को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब केंद्र सरकार ने एक मजबूत कूटनीतिक पहल की है। इसी कड़ी में, इस माह के अंत में सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दुनिया के प्रमुख सहयोगी देशों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्यों के दौरे पर भेजे जाएंगे। इन दौरों का मकसद भारत की आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त ढंग से प्रस्तुत करना है।
इन प्रतिनिधिमंडलों में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख सांसद शामिल हैं
- शशि थरूर (कांग्रेस)
- रविशंकर प्रसाद व बैजयंत पांडा (बीजेपी)
- संजय कुमार झा (जेडीयू)
- कनिमोझी करुणानिधि (डीएमके)
- सुप्रिया सुले (एनसीपी)
- श्रीकांत एकनाथ शिंदे (शिवसेना)
इन प्रतिनिधियों का लक्ष्य दुनिया के सामने पाकिस्तान की आतंकवाद को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों को उजागर करना है। भारत इन वैश्विक मंचों पर यह प्रमाणों सहित बताएगा कि पाकिस्तान ने न केवल आतंकियों को शरण दी है, बल्कि उन्हें भारत विरोधी हमलों के लिए प्रोत्साहित भी किया है।
पीओके में आतंक के ठिकानों पर सीधा वार
भारत का यह आक्रामक रुख 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद सामने आया, जिसमें 26 पर्यटकों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस वीभत्स हमले के जवाब में, 7 मई को भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त किया। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
हालांकि, पाकिस्तान ने जवाबी रूप से यह आरोप लगाया कि भारत ने आम नागरिकों, धार्मिक स्थलों और बच्चों को निशाना बनाया, लेकिन भारतीय सेना ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन का मकसद केवल आतंकी ढांचों का खात्मा था और सिविलियन कैजुअल्टी से बचाव को प्राथमिकता दी गई थी।
दुनिया के सामने भारत की एकजुट आवाज
इन सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट है। यह पहल पाकिस्तान की उस रणनीति को भी निष्फल करने के लिए है, जिसके तहत वह खुद को आतंकवाद से पीड़ित बताकर दुनिया की सहानुभूति प्राप्त करने की कोशिश करता रहा है।
भारत अब यह सुनिश्चित करेगा कि वैश्विक समुदाय को पाकिस्तान की भूमिका की सच्चाई पता चले और उसे आतंकी संगठनों को संरक्षण देने की जिम्मेदारी के लिए जवाबदेह ठहराया जाए।
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