केंद्र सरकार ने एक देश-एक चुनाव को लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अध्यक्षता में जिस कमेटी का गठन किया था उसमें आठ सदस्यों को शामिल किया गया है। कमेटी के सदस्यों के नाम के एलान कर दिया गया है। इस कमेटी में अमित शाह, अधीर रंजन चौधरी, गुलाम नबी आज़ाद, एनके सिंह, सुभाष कश्यप, हरीश साल्वे और संजय कोठारी शामिल होंगे.
क्या हैं एक देश-एक चुनाव ?
भारत में फिलहाल राज्यों के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब है कि पूरे देश में एक साथ ही लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव हों। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य के विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय पर या चरणबद्ध तरीके से अपना वोट डालेंगे।
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साल 1967 तक साथ ही होते थे लोक सभा और विधान सभा चुनाव
आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।
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एक देश-एक चुनाव के फायदे
एक राष्ट्र, एक चुनाव से चुनाव पर होने वाले खर्च में कमी आएगी और इससे पूरे देश में प्रशासनिक व्यवस्था में दक्षता बढ़ेगी। इस संबंध में कहा जाता है कि अलग-अलग मतदान के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था की गति काफी धीमी हो जाती है। सामान्य प्रशासनिक कर्तव्य चुनाव से प्रभावित होते हैं क्योंकि अधिकारी मतदान कर्तव्यों में संलग्न होते हैं। इससे केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों और कार्यक्रमों में निरंतरता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

