Noida: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बिल्डर, कंसोर्टियम, नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ गहन जांच करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार का “विशेष उदाहरण” बताया। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी तीन स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं को लेकर दस अलग-अलग फैसले सुनाए। कोर्ट ने प्रमुख डेवलपर्स और कंसोर्टियम हिस्सेदारों की जवाबदेही तय करते हुए जांच को आवश्यक बताया।
हाईकोर्ट ने कहा – जांच के अलावा कोई विकल्प नहीं
कोर्ट ने पाया कि इस परियोजना में लैंड यूज के उल्लंघन, वित्तीय अनियमितताओं, दिवालिया प्रक्रिया और खेल सुविधाओं के निर्माण में देरी जैसी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में सीबीआई जांच के अलावा किसी अन्य विकल्प पर विचार नहीं कर सकता।
15 हजार खरीदारों का इंतजार बढ़ा
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जहां दोषी अधिकारियों और बिल्डरों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है, वहीं खरीदारों के लिए रजिस्ट्री का इंतजार और लंबा हो सकता है। इस परियोजना के तहत करीब 15,000 फ्लैटों की रजिस्ट्री अभी तक नहीं हुई है। शहर के चार सेक्टरों में स्थित इन परियोजनाओं के खरीदार पिछले सात-आठ वर्षों से रजिस्ट्री के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं।
नोएडा प्राधिकरण ने वर्ष 2021 में हुई बोर्ड बैठक में खेल सुविधाओं के विकास में अनियमितताओं के कारण अधिभोग प्रमाण पत्र जारी करने और भूखंडों के उपविभाजन जैसे कार्यों पर रोक लगा दी थी। तब से इस मामले की जांच जारी है।
कोर्ट को कहां मिली गड़बड़ी?
हाईकोर्ट की जांच में सामने आया कि नोएडा से महत्वपूर्ण लाभ और रियायतें लेने के बावजूद, डेवलपर्स ने अनिवार्य खेल सुविधाओं को विकसित करने की जगह व्यावसायिक परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया।
- यह आदेश सेक्टर-78, 79 और 101 की स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं से संबंधित है।
- सेक्टर-150 में लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स और लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन की स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाएं शामिल हैं।
- सेक्टर-78 और 79 में डेवलपर्स की स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाएं दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैं।
कोर्ट ने इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया को “वित्तीय और कानूनी देनदारियों से बचने की रणनीति” करार दिया।
नोएडा प्राधिकरण को बकाया वसूलने का अधिकार
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रमुख डेवलपर्स ने नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई से बचने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन उनके दावे खारिज कर दिए गए। कोर्ट ने साफ किया कि डेवलपर्स मूल योजना के अनुसार परियोजना का निर्माण नहीं कर सके और इनसॉल्वेंसी को ढाल बनाकर जिम्मेदारी से बचते रहे।
अब नोएडा प्राधिकरण को लंबित बकाया वसूलने और कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। इसके साथ ही, राज्य सरकार को वित्तीय कुप्रबंधन और धोखाधड़ी की विस्तृत जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएजी रिपोर्ट में 30 हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने 2005 से 2017 तक नोएडा प्राधिकरण के कामकाज का ऑडिट किया था, जिसमें 30,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई थी। इन आपत्तियों को लेकर लोक लेखा समिति ने जांच शुरू की थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच लोक लेखा समिति के बजाय सीबीआई द्वारा की जाएगी।
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लोक लेखा समिति कर रही थी सुनवाई
सीएजी की आपत्तियों के आधार पर लोक लेखा समिति सेक्टर-150 और 152 की परियोजनाओं की सुनवाई कर रही थी। समिति ने बिल्डरों से कार्ययोजना लेकर स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में सीबीआई और ईडी की जांच शुरू होने जा रही है, जिससे कई बड़े नामों पर कार्रवाई संभव हो सकती है।

