Noida News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2016 के ऐतिहासिक फैसले को बरकरार रखा, जिसमें दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट (डीएनडी) फ्लाईवे पर टोल लगाने के खिलाफ फैसला सुनाया गया था। नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड (एनटीबीसीएल) की अपील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि फ्लाईवे पर टोल वसूलना अवैध है और ऐसे शुल्क का बोझ यात्रियों पर नहीं डाला जा सकता।
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ का ऐतिहासिक फैसला
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा कि नोएडा प्राधिकरण ने एनटीबीसीएल को टोल वसूलने का अधिकार देकर अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है। कोर्ट ने यह भी बताया कि रियायत समझौते की शर्तें अनुचित थीं, जिनका उद्देश्य एनटीबीसीएल को अनुचित लाभ पहुंचाना था।
सीएजी रिपोर्ट ने परियोजना लागत में अनियमितताओं को उजागर किया
सुप्रीम कोर्ट ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें परियोजना लागत में बार-बार अनुचित वृद्धि को उजागर किया गया था। इस प्रथा ने यात्रियों पर अनुचित बोझ डाला, जिससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हुआ, जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है।
नोएडा की कीमत पर NTBCL को लाभ
अदालत ने आगे कहा कि रियायत समझौते की भाषा इस तरह से बनाई गई थी कि NTBCL को अनिश्चित काल तक लाभ मिलता रहे। यह नोएडा प्राधिकरण और आम जनता के हितों के खिलाफ था। अदालत ने इसे एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में वर्णित किया जिसका उद्देश्य “नोएडा की कीमत पर NTBCL को हमेशा के लिए समृद्ध बनाना” था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय की पुष्टि
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2016 के फैसले को पुष्ट किया, जिसने DND फ्लाईवे पर टोल संग्रह को अवैध घोषित किया था। इस फैसले से लाखों यात्रियों को काफी राहत मिली है, जो DND फ्लाईवे का उपयोग करते हुए वर्षों से भारी टोल शुल्क का सामना कर रहे थे।

