गुर्जर समुदाय के प्रमुख रामकुमार तंवर ने नोएडा मीडिया क्लब में एक प्रेस वार्ता के दौरान एलान किया कि उन्होंने गुजरात के ग्वालियर में 25 सितंबर को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा गुर्जर समुदाय पर किए गए तानाशाही कामों के खिलाफ आवाज उठाई हैं। इसमें जातिवादी मानसिकता और पुलिस द्वारा उत्पीड़न (आंसू गैस के गोले, रबड़ की गोलियाँ, लाठियों से बुजुर्गों पर हमला आदि) शामिल है। वे घोषणा करते हैं कि उनका समुदाय 12 अक्टूबर को जेल भरो आंदोलन आरंभ करेगा। यदि इस दौरान कोई अनहोनी घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन की होगी।
गुर्जर समुदाय ने की प्रेस वार्ता कहा- पुलिस प्रशासन हुआ तानाशाह
वकील रविंद्र भाटी गुर्जर ने इस प्रेस वार्ता में कहा कि पुलिस प्रशासन ने तानाशाही के स्तर को इतना नीचे गिरा दिया है कि अब वे बेकसूर लोगों के खिलाफ संगीन आरोपों में मुकदमे दर्ज कर रहे हैं और उनसे अवैध वसूली कर रहे हैं। वे युवाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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प्रदीप वर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को इस तानाशाही काम को तुरंत बंद करना चाहिए। वे अपनी मां बहनों की और अपने समुदाय की बेइज्जती को बर्दास्त नहीं करेंगे उन्होंने इसे बहुत ही गंभीर मुद्दा बताया और कहा कि प्रशासनिक गुंडागर्दी और तानाशाही के पिक्स तक पहुंच चुकी है। समुदाय के शांतिपूर्ण आंदोलन को अंग्रेजी शासन की तरह निहत्थे युवाओं पर बंदूकें चलाने वाले पुलिसकर्मियों की वीडियो फुटेज में दिख सकती है।
पुलिसिया उत्पीड़न के खिलाफ़ गुर्जर समाज ग्वालियर में करेगा जेल भरो आंदोलन
कश्मीर से कन्याकुमारी तक, गुर्जर समुदाय का शोषण चरम पर है, और इसके परिणामस्वरूप, गुर्जर सम्राट मिहिर भोज सेवा संघ ट्रस्ट ग्वालियर गुर्जर समाज के साथ खड़ा है। यदि ग्वालियर प्रशासन और मध्य प्रदेश सरकार तुरंत निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज झूठे मुकदमों को बंद नहीं करते, अवैध उगाही और उत्पीड़न के लिए जारी छापे मारी को बंद नहीं करते और गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं करते, तो 12 अक्टूबर को देश के विभिन्न प्रांतों से हजारों गुर्जरों द्वारा ग्वालियर में लाखों की संख्या में जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। इसके अलावा, अगर उनकी मांगे नहीं मानी जाती हैं, तो यह आंदोलन देशव्यापी भी होगा।
गुर्जर समुदाय ने रखी ये मांगे
गुर्जर समुदाय के लोग, जो 25 सितंबर को एक महापंचायत आयोजित कर रहे थे और उन पर रासूका, फर्जी मुकदमे और जिन पर इनाम घोषित किए गए हैं, उन मांगों को वापस लिए जाने की मांग करते हैं।
ग्वालियर चौराहे पर स्थित गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की मूर्ति को हटाने की मांग की जाती है, क्योंकि यह देश के करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है।
मध्य प्रदेश के भिंड में स्थित बोरेशर मंदिर से हटाया गया गुर्जर प्रतिहार शासकों का बोर्ड फिर से लगाया जाना चाहिए।
निर्दोष आकाश गुर्जर के खिलाफ फर्जी एनकाउंटर के मामले में उनके परिवार को न्याय और आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
जहां ऐतिहासिक इमारतों से गुर्जर शब्द को हटा दिया गया है, वहां पुनः इसे लिखने की मांग की जाती है।
भारतीय सेना में गुर्जर रेजिमेंट की स्थापना की जानी चाहिए।
ग्वालियर में राजपूत थानों को बंद कर देने की मांग है।
गुर्जर समुदाय को उनकी संख्या के आधार पर राजनीति में प्रतिनिधित्व देने की मांग है।

