नोएडा प्राधिकरण के संस्थागत और औद्योगिक विभाग के अंतर्गत आने वाली फैक्टि्रयों व ऑफिसों के 49 प्लॉटों के आवंटन निरस्त कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के जून 2022 के अध्यादेश के क्रम में यह यह कार्रवाई की गई ऐसे प्लॉट आवंटियों ने आवंटन के आठ साल बाद भी काम शुरू नहीं किया था। प्लॉट निरस्तीकरण की कतार में और भी आवंटी हैं।
दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण से यह पूछा था कि जून 2022 के अध्यादेश के क्रम में औद्योगिक और संस्थागत विभाग के कितने प्लॉट आवंटियों ने अब तक काम शुरू नहीं किया। इसी क्रम में प्राधिकरण की ओर से शहर में सर्वे कराया गया। इसकी फोटोग्राफी आदि भी कराई गई। इसमें पता चला कि औद्योगिक विभाग में 291 ऐसी फैक्टि्रया हैं जो बिना क्रियाशीलता प्रमाण पत्र के हैं।
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नोएडा प्राधिकरण ने आवंटित फैक्ट्रियों ऑफिसो को किया निरस्त
यानी मानको के मुताबिक वहां अब तक काम शुरू नहीं हुआ। इसमें कई कैटेगरी में ऐसे आवंटी पाए गए। तीन आवंटी ऐसे मिले, जिन्होंने 2012 के बाद से अब तक प्लॉट पर फैक्ट्री का निर्माण ही नहीं कराया था। करीब 65 आवंटी ऐसे पाए गए, जिन्होंने निर्माण तो करा लिया है, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं कराया। इनमें कई ऐसे आवंटी भी सर्वे में मिले, जिन्होंने क्रियाशीलता के मानक की धज्जी उड़ा कर रख दी थी। ऐसे में औद्योगिक विभाग के 29 अति गंभीर मामलों में कार्रवाई करते हुए आवंटन निरस्त कर दिया गया। वहीं जिनको प्राधिकरण ने एक और मौका दिया है, वह ऐसे आवंटी हैं जो क्रियाशीलता प्रमाण पत्र के लिए या तो आवेदन कर चुके हैं या फिर आवेदन करने का वादा कर रहे हैं।
आवंटियों की रिपोर्ट शासन को जाएगी भेजी
औद्योगिक विभाग की रिपोर्ट प्राधिकरण ने पहले ही भेज दी है। इसी तरह से संस्थागत विभाग के 108 प्लॉट बिना क्रियाशीलता प्रमाण पत्र के पाए गए। इनमें से 29 के आवंटन प्राधिकरण ने निरस्त कर दिए। बाकी बचे हुए आवंटियों ने कई समस्याओं का हवाला दिया। ऐसे में इनके आवंटन निरस्त होने से बच गए। अब इन सभी आवंटियों की रिपोर्ट शासन को भेजी जानी है।
नोएडा प्राधिकरण के औद्योगिक और संस्थागत विभाग के 1936 प्लॉट आवंटी मानक को पूरे नहीं कर रहे। सूत्रों के मुताबिक औद्योगिक विभाग में 11194 प्लॉट का आवंटन किया जा चुका है। इनमें से 9758 प्लॉट क्रियाशील हैं। यानी प्राधिकरण के दस्तावेजों में यहां काम हो रहा है। बाकी बचे 1436 प्लॉट आवंटी मौके पर काम नहीं कर रहे हैं। इसी तरह से संस्थागत विभाग के कुल 1217 आवंटनों में से क्रियाशील इकाइयों की संख्या 717 है। यानी 500 प्लॉट आवंटी ऐसे हैं, जिन्होंने अपने प्लॉट क्रियाशील नहीं कराए।

