Noida Authority: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में प्रशासनिक हलचल मचाते हुए 14 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब शासन द्वारा तबादले के आदेशों के बावजूद इन अधिकारियों ने नए स्थानों पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। निलंबित अधिकारियों में विधि विभाग के सुशील भाटी और वित्त विभाग के प्रमोद भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने निलंबन के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने उनके निलंबन पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिससे उन्हें अस्थायी राहत मिली है। हालाँकि, न्यायालय का आदेश अभी तक आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ है।
निलंबन की वजह
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि शासन ने तबादला आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद 14 अधिकारियों ने नए स्थान पर ज्वाइन नहीं किया। अधिकारियों के अनुसार, इनकी यह लापरवाही प्रशासनिक कार्यों में बाधा डाल रही थी, जिसके चलते सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इन सभी को निलंबित करने का निर्णय लिया। शासन का कहना है कि इन अधिकारियों ने तबादला आदेश का पालन न करते हुए अपने वर्तमान कार्यस्थल पर लापरवाही दिखाई, जिसके कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुआ।
दो अधिकारियों की अपील
विधि विभाग के सुशील भाटी और वित्त विभाग के प्रमोद ने अपने निलंबन को अनुचित बताते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की। उन्होंने तर्क दिया कि प्राधिकरण में स्टाफ की कमी के कारण उन्हें रिलीव नहीं किया गया, जिसके चलते वे नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके। उनका कहना है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है और निलंबन का आदेश अन्यायपूर्ण है।
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उच्च न्यायालय का फैसला
उच्च न्यायालय ने दोनों अधिकारियों की अपील पर विचार करते हुए उनके निलंबन पर अस्थायी रोक लगा दी है। अदालत ने आदेश दिया है कि दोनों अधिकारी जल्द ही अपने नए स्थानों पर कार्यभार ग्रहण करें। इस अस्थायी राहत से अन्य निलंबित अधिकारियों को भी न्यायालय से राहत मिलने की उम्मीद बंधी है, और कई अन्य अधिकारी भी अब इसी तरह की अपील करने की तैयारी कर रहे हैं।

