साल 2008 में हुए मुंबई हमले के आरोपी और पाकिस्तानी मूल के कनाडाई कारोबारी को तहव्वुर राणा को अमेरिका की एक अदालत ने भारत को प्रत्यारोपित करने की अनुमति दे दी हैं इतना ही नहीं तहव्वुर हुसैन राणा को जल्द ही अमेरिका से भारत लाया जाएगा आपको बता दें की भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी आतंकवादी हमलों में उसकी भूमिका की जांच करने में जुट चुकी हैं इसलिए भारत की तरफ से मांग हुई कि उसे भारत भेजा जाए,
जिसके चलते अमेरिका के कैलिफोर्निया में अदालत ने 16 मई को इस संबंध में भारत के पक्ष में फैसला सुनाया तो वंही NIA ने बताया है कि वो राजनयिक माध्यमों से तहव्वुर राणा को भारत लाने की कार्यवाही शुरू करने को तैयार है|
आपको बता दें की तहव्वुर हुसैन राणा कथित तौर पर हेडली की बैठकों और हमलों की योजना के बारे में जानता था तो वंही दूसरी और भारत के पक्ष में अमेरिकी सरकार ने जोर देकर कहा कि तहव्वुर हुसैन राणा आतंकवादी हमले की साजिश का हिस्सा था,सुनवाई के दौरान सुनवाई के दौरान राणा का वकील लगातार प्रत्यर्पण का विरोध भी करता रहा|
तहव्वुर राणा की हिस्ट्री
दरअसल तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और आर्मी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई भी की जिसके चलते तहव्वुर राणा ने पाकिस्तान आर्मी में 10 साल तक बतौर डॉक्टर काम भी किया, लेकिन तहव्वुर राणा को अपना काम पसंद नहीं आया और उसने नौकरी छोड़ दी तो वही दूसरी और फिर तहव्वुर राणा ने कनाडा की नागरिकता लेकर वहां बिजनेस शुरू किया इसके बाद में तहव्वुर राणा ने शिकागो में भी बिजनेस किया इतना ही नहीं अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, उसने कनाडा, पाकिस्तान, जर्मनी और इंग्लैंड की यात्राएं की भी हैं. तो इस मुताबिक़ वो लगभग 7 भाषाएं भी बोल सकता है|
क्या कहा NIA ने
आपको बता दें की भारत ने तहव्वुर राणा को भगोड़ा घोषित कर रखा है तो वंही उसके खिलाफ NIA की विशेष अदालत ने 28 अगस्त, 2018 को गिरफ्तारी का वॉरंट भी जारी किया था जिसके चलते साल 10 जून 2020 को एक शिकायत दर्ज करते हुए तहव्वुर राणा की अस्थाई गिरफ्तारी की मांग की गई.साल 2008 के मुंबई आतंकी हमलों में छह अमेरिकियों समेत कुल 166 लोग मारे गए थे जिनमें 6 लोग अमेरिकी थे,इतना ही नहीं हमले में 10 आतंकवादियों ने मुंबई में 60 घंटे से ज्यादा देर तक घेराबंदी की और लोगों पर ताबड़तोड़ हमला भी किया|

