उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव का सिलसिला अब खत्म हुआ,नगर निकाय चुनावों की तारीख घोषित होने से लेकर भाजपा,सपा जैसी तमाम पार्टियों ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन तक एड़ी चोटी का ज़ोर लगाया इतना ही नहीं ज़ुबानी हमले भी किये गए लेकिन जैसी ही नगर निकाय चुनाव खत्म हुए और 13 मई को चुनावों के नतीजे और जैसी ही नतीजों के रुझान आने शुरू हुए, सपा और बसपा दोनों ही भाजपा पर हमलावर हो गयी और बड़े बड़े आरोप भी लगाने लगी ,दरअसल यूपी विधानसभा चुनाव और अब नगर निकाय चुनाव में हारने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती आने वाले लोकसभा चुनावो में पार्टियों की संभावित स्तिथियों को लेकर काफी सतर्क हो गयी हैं और घबरा गयी हैं।
लाखो जद्दो जहद करने के बाद भी आपको बता दें की निकाय चुनाव में मायावती की नयी सोशल इंजीनियरिंग की कोशिश भी काम नहीं आयी बसपा ने मेयर की 17 सीटों पर 11 मुस्लिम उम्मीदवार खड़े किये थे इसके बावजूद भी बसपा को हार का सामना करना पड़ा यहां तक की नगर पालिका परिषद् और नगर पंचायत में भी पार्टी का प्रदर्शन पूरी तरह निराशाजनक रहा,हाँ लेकिन बसपा को अकेली राहत यह रही की उसके सहारनपुर,ग़ाज़ियाबाद और आगरा में मेयर की सीट पर प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहें तो वहीं निकाय चुनावो के नतीजों ने साफ़ कर दिया की ज़्यादा से ज़्यादा मुस्लिमो को टिकट देकर बसपा को मुस्लिम समाज से जैसी उम्मीद थी,वैसा कुछ नहीं हुआ बजाय इसके बसपा और नीचे आ गिरी।
अब चुनावों में लगातार मुँह की खाने के बाद भी मायावती चुप ना बैठने की बजाय मायावती निकाय चुनावो में मिली हार की वजह जानने के लिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने वाली हैं आपको बता दें की ये बैठक 18 मई को होगी उत्तर प्रदेश में अब क्योंकि सियासत काफी गरम हैं जिसके चलते यह माना जा रहा हैं की यह बैठक काफी अहम होने वाली हैं इसी के साथ इस बैठक में आपको बता दें की मंडल प्रभारियों,जिलाध्यक्षों के साथ वामसेफ के दो पदाधिकारियों को बुलाया गया हैं इसी के साथ बसपा का साल 2017 की अपेक्षा इस बार निकाय चुनाव में काफी ख़राब परफॉरमेंस रहा हैं जंहा पिछले चुनाव में बसपा को मेयर की दो सीटों पर जीत मिली थी लेकिन इस बार बसपा को कोई सीट नहीं मिली बल्कि जीत का प्रतिशत ही कम हो गया
बसपा सुप्रीमो बहन जी अभी भी बाज़ नहीं आ रही,कुछ ही दिन पहले मायावती ने रौद्र रूप में बीजेपी को एक और बार ललकार दिया की मैं अपना इन्तेक़ाम लेकर रहूंगी चुप नहीं बैठूंगी और इसका हिसाब बीजेपी को देना पड़ेगा,अब लगातार ऐसे हार का सामना करने के बाद यह भी जायज़ हैं।
अब आपको बता दें की अगर सूत्रों की माने तो 18 मई को बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा बुलाई गयी बैठक में 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र रणनीति बनाई जायेगी साथ ही साथ निकाय चुनाव में मिली हार के कारणों की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय करने और आगे के लिए ज़रूरी कदम उठाने पर भी विचार होगा
अब जंहा मायावती अभी बैठकें कर रही हैं और अभी भी ताबड़तोड़ ज़ुबानी हमले करने में लगी हैं तो वंही दूसरी और बीजेपी फुल एक्शन में हैं दरअसल उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद अब बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति भी बना ली हैं आपको बता दें 30 मई को बीजेपी का महासंपर्क अभियान शुरू होने जा रहा है जिसमे बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. यही वजह है कि 30 मई से लेकर 30 जून तक पूरे प्रदेश में महासंपर्क अभियान चलाया जाएगा, जिसमें लोकसभा के सांसद वोटर से संपर्क करेंगे और संवाद करेंगे और मोदी सरकार के 9 साल की जो उपलब्धियां हैं उन्हें लोगों को बताया जाएगा. इसमें बीजेपी का खास फोकस उस लाभार्थी वोट बैंक पर भी है, जिसे तमाम योजनाओं का फायदा मिल रहा है…
दिन पर दिन बीतते जा रहे हैं लेकिन मायावती के वार जो हैं वो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे ऐसे में अब ये देखना काफी दिलचस्प होगा की मायावती यूँ ही बड़ी बड़ी बातें बोलेंगी या फिर बीजेपी की तरह एक्शन मोड में आएगी

