Magh Mela 2026: प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेले के सबसे बड़े स्नान पर्व ‘मौनी अमावस्या’ पर आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला है। संगम तट पर मचे इस घमासान ने उस वक्त गंभीर रूप ले लिया जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पवित्र गंगा स्नान करने से साफ इनकार कर दिया। प्रशासन द्वारा रोके जाने और समर्थकों के साथ हुई कथित बदसलूकी से नाराज शंकराचार्य का यह कदम मेला प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।
रथ रोकने पर रार
शनिवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने पहुंचे थे। भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि तिल रखने की जगह नहीं बची थी। इसी बीच, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का काफिला और रथ संगम नोज की तरफ बढ़ा, तो सुरक्षा में तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। प्रशासन का तर्क था कि भीड़ अधिक होने के कारण रथ को ले जाना सुरक्षित नहीं होगा, इसलिए शंकराचार्य पैदल ही स्नान के लिए प्रस्थान करें।
समर्थकों से बदसलूकी?
प्रशासन द्वारा रथ रोके जाने की बात शंकराचार्य के शिष्यों और समर्थकों को नागवार गुजरी। देखते ही देखते वहां बहस शुरू हो गई। बात सिर्फ कहासुनी तक सीमित नहीं रही, बल्कि आरोप है कि पुलिस और समर्थकों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। शंकराचार्य के अनुयायियों का कहना है कि पुलिस ने संतों और शिष्यों के साथ अभद्रता की और बल प्रयोग किया, जिससे संतों के सम्मान को ठेस पहुंची है। इस घटनाक्रम ने मौके पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।
स्नान से इनकार
अपने शिष्यों के साथ हुए दुर्व्यवहार और प्रशासन के रवैये से आहत होकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने विरोध स्वरूप संगम में स्नान करने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक संतों का सम्मान बहाल नहीं होता और उचित व्यवस्था नहीं दी जाती, वे स्नान नहीं करेंगे। शंकराचार्य के इस ‘स्नान सत्याग्रह’ ने प्रशासन के हाथ-पांव फूला दिए हैं। एक तरफ लाखों श्रद्धालुओं को संभालने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ देश के शीर्ष संत की नाराजगी।
प्रशासन की दलील
प्रयागराज पुलिस और मेला प्रशासन का कहना है कि उनकी प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा है। संगम नोज पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण भगदड़ जैसी स्थिति न बने, इसीलिए वाहनों और रथों को रोका गया था। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने केवल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए वैकल्पिक मार्ग या पैदल जाने का अनुरोध किया था। हालांकि, समर्थकों के उग्र होने पर पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी।
हाई-वोल्टेज ड्रामा
फिलहाल संगम क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। आला अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं और शंकराचार्य को मनाने की कोशिशें जारी हैं। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। मौनी अमावस्या जैसे पावन दिन पर हुए इस विवाद ने माघ मेले की वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालु अब भी इसी उम्मीद में हैं कि गतिरोध खत्म होगा और शंकराचार्य शाही स्नान संपन्न करेंगे।
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