High court judgement on sambhal: संभल की जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में आज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मस्जिद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा कराए जा रहे सर्वे के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही अब जामा मस्जिद के सर्वे का रास्ता साफ हो गया है, जिससे हिंदू पक्ष को बड़ी राहत मिली है, जबकि मुस्लिम पक्ष को तगड़ा झटका लगा है।
क्या है मामला?
यह पूरा विवाद उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मोहल्ला कोट पूर्वी इलाके में स्थित जामा मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थान प्राचीन श्री हरिहर मंदिर था, जिसे बाद में मस्जिद में बदल दिया गया। इसी दावे को आधार बनाकर हिंदू पक्ष ने यह मांग की थी कि उन्हें इस स्थल में प्रवेश का अधिकार दिया जाए। वहीं, संभल जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने इस दावे और ASI सर्वे के खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए संभल जिला न्यायालय में चल रही मूल वाद की अदालती कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट का निर्णय
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत में हुई थी। उन्होंने 13 मई को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। आज कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि “सर्वे को रोका नहीं जाएगा और संबंधित वाद की कार्यवाही आगे जारी रहेगी।”
हिंदू पक्ष की प्रतिक्रिया
हिंदू पक्ष की ओर से इसे “सत्य की जीत” बताया गया है। उनका कहना है कि इस सर्वे से ऐतिहासिक तथ्यों का पता चलेगा और यह साबित होगा कि वहां पहले मंदिर था।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा संभल जामा मस्जिद के सर्वे से किसी को क्या परेशानी होनी चाहिए? भारत का न्यायालय हमेशा सत्य के साथ होता है। अब जब कोर्ट ने सर्वे की अनुमति दी है, तो सत्य सामने आएगा और वहां मंदिर की पुनः स्थापना होगी।
आगे क्या?
अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद ASI को सर्वेक्षण कार्य शुरू करने का कानूनी अधिकार प्राप्त हो गया है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष इस निर्णय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का रुख कर सकता है, जिससे मामला और लंबा खिंच सकता है।
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