Ghaziabad News: गाजियाबाद में तालाबों और जलाशयों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार और गाजियाबाद के जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर दिया है। यह मामला तब सामने आया जब याचिकाकर्ता सुशील राघव ने एनजीटी में शिकायत दर्ज कराई कि गाजियाबाद के तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने के लिए जो आदेश 2021 में दिए गए थे, उन्हें लागू नहीं किया गया।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेष सदस्य ईश्वर सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हलफनामा दाखिल करें। इसके अलावा, अधिकारियों को यह भी कहा गया कि अगर वे बिना वकील के जवाब देना चाहते हैं, तो उन्हें वर्चुअल सुनवाई में उपस्थित होना होगा। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई है।
2021 का आदेश और प्रशासन की अनदेखी
दरअसल, एनजीटी ने 17 मार्च 2021 को गाजियाबाद के जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को एक आदेश दिया था। इसमें कहा गया था कि तालाबों और जलाशयों पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाए, नियमित बैठकें की जाएं और सभी प्रगति की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाए। साथ ही, लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने को भी कहा गया था। लेकिन याचिकाकर्ता सुशील राघव के मुताबिक, प्रशासन ने इस आदेश का ठीक से पालन नहीं किया और इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
गाजियाबाद में कितने तालाबों पर अतिक्रमण?
गाजियाबाद जिले में कुल 1075 तालाब हैं, जिनमें से 231 तालाबों पर अवैध कब्जा किया गया है। यह जानकारी गाजियाबाद के जिलाधिकारी द्वारा 28 अप्रैल 2025 को जारी की गई रिपोर्ट से सामने आई है। जिलाधिकारी के अनुसार, गाजियाबाद के तालाबों की कुल ज़मीन 525.18 हेक्टेयर है, जिसमें से 57.04 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा हुआ है।
जलाशयों और तालाबों पर अतिक्रमण
तालाबों पर कब्जे की स्थिति इस प्रकार है।
- तहसील सदर: 217 तालाब, 29 पर कब्जा
- तहसील मोदीनगर: 579 तालाब, 120 पर कब्जा
- तहसील लोनी: 139 तालाब, 38 पर कब्जा
- नगर निगम गाजियाबाद: 140 तालाब, 44 पर कब्जा
इन तथ्यों के आधार पर यह साफ है कि गाजियाबाद में जलाशयों और तालाबों पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इस मुद्दे को लेकर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है और प्रशासन से जवाब मांगा है। अब यह देखना होगा कि सरकार और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और कितनी जल्दी इन अतिक्रमणों को हटाया जाता है।
अगली सुनवाई में उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर और भी ठोस निर्णय लिए जाएं।
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