Ghaziabad News: मामला टीला मोड़ थानाक्षेत्र का हैं जहां बाप और बेटे बर्तन बनाने के लिए मिट्टी लेने गए और नील गायों का शिकार हो गए। निस्तौली गांव के निवासी ताराचंद प्रजापति अपने परिवार के साथ गांव में रहते थे। उनके छ: बेटे थे। उनका छोटा बेटा सुरेश गांव में रहकर मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करता था तो वहीं एक बेटा गांव में रहकर नौकरी करता था।
भाई के लिए लेने गया था मिट्टी
ताराचंद का छोटा बेटा दिनेश बुधवार सुबह चार बजे अपने बेटे के साथ खेत पर मिट्टी लेने गए थे। मिट्टी भर कर दिनेश और उनका बेटा घर की ओर लौट ही रहे थे कि अचानक सामने से नील गायों का एक झुंड निकल कर आता है और बुग्गी में जोर-जोर से टक्कर मारने लगता है। बुग्गी में टक्कर लगने से दिनेश का बेटा प्रियांशु बग्गी से नीचे गिर जाता है। और बुग्गी का एक पहिया उसकी गर्दन पर चढ़ जाता है। जिसके बाद खच्चर बेकाबू हो जाता है और भागने लगता है और बुग्गी खाई में गिर जाती हैं।
कही से नहीं मिली मदद
जंगल में सुबह 4 बजे का समय था इसलिए वहां कोई और मौजूद नही था। जिसके कारण उन दोनों पिता पुत्र को किसी भी तरह की मदद नहीं मिल पाई। मदद ना मिलने पर दोनों ने वहीं पर तड़फ-तड़फ कर दम तोड़ दिया। दिन निकलने के बाद जब गांव के लोग जंगल की ओर पहुंचे तो उन्हे घटना का पता चला।
मौके पर पहुंची पुलिस
घटना का पता चलते ही पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच गई। लेकिन ताराचंद के परिवार वालों ने मामले की कार्रवाही से मंना कर दिया और शवों का पोस्टमार्टम नहीं होने दिया। हादसे के बाद से लोगों में मातम की स्थिति बनी हुई है। लोगों को नील गायो का डर सता रहा हैं।
गांव में ही हुआ अंतिम संस्कार
हादसा होने के बाद पिता और पुत्र दोनों का अंतिम संस्कार गांव के शमशान घाट पर ही किया गया। हादसा होने के बाद से पूरे गांव में मातम फैल गया। लोगों की आंखे दुख से नम हो गई है।

