Ghaziabad: गाजियाबाद जिले ने रियल एस्टेट घपलों के मामलों में रिकवरी के मामले में प्रदेश के अन्य जिलों को पीछे छोड़ दिया है। यूपी रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद में बिल्डरों से वसूली के 76 प्रतिशत मामलों का निस्तारण किया गया है। वहीं, पड़ोसी जिला गौतमबुद्ध नगर केवल 29 प्रतिशत रिकवरी करने में सफल रहा है।
रेरा के आदेशों पर प्रशासन ने दी राहत
बिल्डरों द्वारा ग्राहकों (आवंटियों) के साथ किए गए गड़बड़झाले के मामलों में, रेरा द्वारा जारी रिकवरी चालानों की वसूली जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। गाजियाबाद में 1065 मामलों में यूपी रेरा द्वारा रिकवरी चालान जारी किए गए थे। इनमें से 699 रिकवरी चालान की वसूली हो चुकी है, जिससे कुल 204.47 करोड़ रुपये आवंटियों को लौटाए गए।
गौतमबुद्ध नगर पीछे
गौतमबुद्ध नगर में कुल 5297 रिकवरी चालान जारी किए गए, लेकिन केवल 1226 चालान पर ही वसूली हो सकी। इसमें कुल 405.03 करोड़ रुपये वसूले गए हैं, जबकि 4071 चालानों से 1512.90 करोड़ रुपये की रिकवरी अब भी लंबित है।
राजस्व आंकड़ों में गाजियाबाद अव्वल, लेकिन राशि के मामले में गौतमबुद्ध नगर आगे
जहां रिकवरी मामलों के निस्तारण के अनुपात में गाजियाबाद सबसे आगे है, वहीं वसूली गई राशि के मामले में गौतमबुद्ध नगर शीर्ष पर है। गौतमबुद्ध नगर ने अब तक 1226 रिकवरी चालानों के जरिए 405.03 करोड़ रुपये की रिकवरी की है। गाजियाबाद ने 699 चालानों के जरिए 204.47 करोड़ रुपये वसूले हैं।
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प्रदेश में लखनऊ का प्रदर्शन धीमा
लखनऊ ने अब तक 423 चालानों से केवल 88.65 करोड़ रुपये की रिकवरी की है, जबकि 600 रिकवरी चालान लंबित हैं।
क्या कहती है स्थिति?
गाजियाबाद प्रशासन के अधिकारियों का मानना है कि रिकवरी की उच्च दर उनकी तेज कार्रवाई और निगरानी का परिणाम है। वहीं, गौतमबुद्ध नगर के अधिक संख्या में मामलों और लंबित राशि ने रिकवरी प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
प्रदेश में बिल्डरों के खिलाफ रिकवरी प्रक्रिया को तेजी से लागू करना, आवंटियों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। गाजियाबाद का मॉडल अन्य जिलों के लिए प्रेरणा स्रोत साबित हो सकता है।

