28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन पर भारत में एक ऐतिहासिक पल होने वाला है। मदुरै अधीनम के प्रधान पुजारी श्री हरिहर देसिका स्वामीगल ने कहा है कि पीएम मोदी को वैश्विक सराहना मिली है और देश में सभी को उन पर गर्व है इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजदंड ‘सेंगोल’ भेंट किया जाएगा। इसके साथ साथ पुजारी ने ये तक कह दिया कि 2024 में एक बार फिर प्रधानमंत्री के रूप में लौटना चाहिए।
अब ऐसा तो हो हीं नहीं सकता कि भारत में कोई भी काम बिना किसी राजनीति के पूरा हो जाए अब सेंगोल को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा और पीएम मोदी पर निशाना साधा है और कहा है कि बीजेपी को लग रहा है कि अब सत्ता सौंपने का समय आ गया है। बीजेपी सिर्फ और सिर्फ नफरत की राजनीति, अपने आपको सबसे ऊपर रखने की बात कहती है। इस देश के योगदान में ना जानें कितने विचारों की भूमिका रही है। लेकिन बीजेपी सबको एक एक कर भूला रही है। बीजेपी यह बात भूल गई है कि हमारा संविधान किसी एक मजहब को मानने वाला नहीं है। बीजेपी जिस तरह से अपनी राजनीति को आगे बढ़ा रही है एक बात तो साफ है कि बहुत जल्द ही जनता उन्हें नकार देगी।
सेंगोल राजदंड का इतिहास
आज हम जानते हैं की सेंगोल आखिर हैं क्या जिसे नए संसद भवन में रखा जाने वाला हैं। दरअसल सेंगोल तमिल भाषा के शब्द ‘सेम्मई’ से मिलकर बना हुआ शब्द है जिसका अर्थ होता है धर्म, सच्चाई और निष्ठा तो वंही 14 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने तमिलनाडु की जनता से सेंगोल को स्वीकार किया था..
अब क्योंकि 28 मई को भारत के बहुप्रतीक्षित नए संसद भवन का उद्घाटन किया जा रहा हैं तो आपको बता दें की हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिस दौरान अमित शाह ने कहा कि नया संसद भवन हमारे इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और सभ्यता को आधुनिकता से जोड़ने का सुंदर प्रयास है और इस अवसर पर एक ऐतिहासिक परंपरा पुनर्जीवित हो रही है साथ ही उन्होंने एलान भी किया कि नए संसद भवन में सेंगोल स्थापित किया जाएगा..
अब यह सेंगोल चर्चा में आया कैसे और क्यों?
आपको बता दें की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्वतंत्रता के एक ‘महत्वपूर्ण ऐतिहासिक’ प्रतीक ‘सेंगोल’ की प्रथा को फिर से शुरू करने का एक बड़ा एलान किया हैं अमित शाह ने बताया की यह अंग्रेजों से भारतीयों की सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक था,साथ ही शाह ने कहा कि पीएम मोदी नए संसद भवन के उद्घाटन से पहले तमिलनाडु से सेंगोल प्राप्त करेंगे और पीएम मोदी खुद इसे नए संसद भवन के अंदर स्थापित करेंगे।
बता दें की सेंगोल स्पीकर की सीट के पास रखा जाने वाला हैं ,गृहमंत्री अमित शाह ने आगे बताया की , ‘इस पवित्र सेंगोल को किसी संग्रहालय में रखना अनुचित है तो वंही सेंगोल की स्थापना के लिए संसद भवन से अधिक उपयुक्त, पवित्र और उचित स्थान कोई हो ही नहीं सकता, इसलिए जब संसद भवन देश को समर्पण होगा, उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी विनम्रता और भाव के साथ तमिलनाडु से आए से सेंगोल को स्वीकार करेंगे तमिलनाडु के साथ साथ इस सेंगोल का बहुत बड़ा महत्व पूरे देश भर में है। तो वहीं जब पीएम मोदी को इस बारे में पता चला तो उन्होंने इसके लिए ज़्यादा जानकारी हासिल करने को कहा
आखिर क्या दर्शाता है सेंगोल
दरअसल, सेंगोल ब्रिटिश सरकार से भारतीयों के हाथों में ली गई सत्ता की शक्ति को दर्शाता है जिसका जनक सी. राजगोपालचारी को कहा जाता है, जो कि चोला साम्राज्य से काफी प्रेरित थे साथ ही उस दौरान चोला साम्राज्य में जब भी एक राजा से दूसरे राजा के पास सत्ता का हस्तांतरण होता था, तब इस तरह का सेंगोल दूसरे राजा को दिया जाता था, जो कि सत्ता हस्तांतरण को दर्शाता था।
आपको बता दें की 1947 में भारतीय स्वतंत्रता के बाद, भारत सरकार द्वारा सेंगोल राजदंड का उपयोग नहीं किया गया था। हालांकि, सेंगोल राजदंड अभी भी भारतीय सम्राट की शक्ति और अधिकार का प्रतीक है जो की यह भारत के समृद्ध इतिहास की याद दिलाता है, इतना ही नहीं यह देश की आजादी का प्रतीक है।
हालांकि अमित शाह ने बाद में एक वेबसाइट भी लॉन्च की, जिसमें लघु वृत्तचित्रों के साथ-साथ राजदंड के महत्व से संबंधित पृष्ठभूमि की जानकारी दी गयी हैं आपको बता दें की संवाददाता सम्मेलन में राजदंड और सत्ता हस्तांतरण के संबंध में उस समय की मीडिया खबरों पर आधारित एक छोटी सी फिल्म भी दिखाई गई जबकि वेबसाइट में राजदंड के बारे में उल्लेख है और नेहरू जी की एक दुर्लभ तस्वीर भी है, जिसे ‘सेंगोल’ पर लघु फिल्म में भी दिखाया गया है।

