Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला आज एक बार फिर देशभर की नजरों में है। बसंत पंचमी के अवसर पर यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के धार्मिक कार्यक्रम एक ही दिन और एक ही परिसर में आयोजित किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार पूजा और नमाज के समय अलग-अलग तय किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो और शांति बनी रहे।
सूर्योदय से शुरू हुई मां सरस्वती की आराधना
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सुबह सूरज निकलते ही हिंदू समाज की ओर से मां वाग्देवी सरस्वती की विशेष पूजा आरंभ हो गई। यह पूजा पूरे दिन चलेगी, हालांकि दोपहर के तय समय में इसे अस्थायी रूप से रोका जाएगा। श्रद्धालु पारंपरिक मंत्रोच्चार, हवन और वेद पाठ के साथ बसंत पंचमी का पर्व मना रहे हैं।
दोपहर में जुमे की नमाज की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय जुमे की नमाज अदा करेगा। अदालत ने दोनों पक्षों को समयबद्ध धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देते हुए प्रशासन को सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का संतुलित फैसला
पूजा और नमाज को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने संतुलित आदेश पारित किया। अदालत ने हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की छूट दी, लेकिन दोपहर 1 से 3 बजे के बीच पूजा रोकने का निर्देश दिया। वहीं मुस्लिम पक्ष को इसी समयावधि में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई।
धार बना हाई-सिक्योरिटी जोन
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। पूरे धार शहर को सुरक्षा के लिहाज से छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
- CRPF, RAF और राज्य पुलिस के 8,000 से अधिक जवान तैनात
- संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन और AI कैमरों से निगरानी
- भोजशाला में प्रवेश से पहले कई स्तर की बैरिकेडिंग
- विशेष पास के जरिए ही श्रद्धालुओं को अनुमति
प्रशासन का कहना है कि हर गतिविधि पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।
शोभायात्रा और धर्म सभा का आयोजन
भोजशाला उत्सव समिति के अनुसार, कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू समाज में खासा उत्साह देखा जा रहा है। सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया है।
- सुबह 10 बजे भव्य शोभायात्रा की शुरुआत
- प्रमुख चौराहों से गुजरते हुए यात्रा तय स्थल तक पहुंचेगी
- इसके बाद विशाल धर्म सभा आयोजित होगी
- संत-महात्मा और सामाजिक नेता सभा को संबोधित करेंगे
गर्भगृह में महाआरती और यज्ञ
दोपहर के समय निर्धारित अंतराल के बाद श्रद्धालु भोजशाला के गर्भगृह में प्रवेश कर महाआरती करेंगे। पूरे दिन वेद पाठ, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान चलते रहेंगे। सूर्यास्त के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति की जाएगी।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति, संयम और सहयोग बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह आयोजन आपसी सौहार्द और कानून के सम्मान का उदाहरण बने, यही उद्देश्य है।
क्यों है यह दिन खास
भोजशाला में एक ही दिन पूजा और नमाज का आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक समरसता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह आयोजन कानून और परंपरा के संतुलन का प्रतीक बन गया है।
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