Delhi News: राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को लेकर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (DIMTS) के तहत चल रहीं 533 बसों का संचालन अब अधर में है। इन बसों का अनुबंध खत्म हो चुका है और इनका भविष्य अब दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिका है। हाईकोर्ट 15 जुलाई को यह तय करेगा कि ये बसें सड़कों पर दौड़ती रहेंगी या नहीं।
दिल्ली की बस व्यवस्था पर बड़ा असर
इस समय दिल्ली की सड़कों पर कुल 6368 बसें चल रही हैं। इनमें दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) के पास 3372 बसें हैं – जिनमें 1170 CNG बसें, 1800 इलेक्ट्रिक (12 मीटर) बसें और 402 देवी (9 मीटर) बसें शामिल हैं। वहीं DIMTS के पास 2996 बसें हैं – इनमें 2283 CNG, 380 इलेक्ट्रिक और 333 देवी बसें हैं।
डिम्ट्स के अंतर्गत जो 533 बसें चल रही थीं, वे निजी सीएनजी बसें हैं और इनका अनुबंध खत्म हो चुका है। सरकार और ऑपरेटर्स के बीच मामला कोर्ट में चल रहा है, और 15 जुलाई को कोर्ट का फैसला आने की उम्मीद है।
क्या होगा अगर बसें बंद हो गईं?
अगर कोर्ट ने इन 533 बसों को सड़कों से हटाने का फैसला दिया, तो दिल्ली में बसों की संख्या घटकर 5835 रह जाएगी। पहले से ही दिल्ली को करीब 11,000 बसों की ज़रूरत है, लेकिन अभी यह संख्या आधी भी नहीं है। ऐसे में बसों की कमी और लंबा इंतजार यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
रोजाना 40 लाख से ज्यादा यात्री करते हैं सफर
दिल्ली में हर दिन लगभग 40 लाख लोग बसों से सफर करते हैं। ऐसे में बसों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। लेकिन मौजूदा स्थिति में पर्याप्त संख्या में नई बसें लाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अब तक सरकार ने कुछ 9 मीटर लंबी देवी बसें शामिल की हैं, जो आमतौर पर छोटी सड़कों और लोकल रूट्स पर लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए उपयोग की जाती हैं। लेकिन बड़े रूटों पर इलेक्ट्रिक या सीएनजी बसों की गंभीर कमी है।
2027 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसें लाने का दावा
दिल्ली सरकार की ओर से यह दावा किया गया है कि वर्ष 2027 के अंत तक राजधानी की बस सेवा पूरी तरह इलेक्ट्रिक कर दी जाएगी। यानी आने वाले समय में पुरानी बसों की जगह नई इलेक्ट्रिक बसें लाई जाएंगी। हालांकि, जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक बसों की मौजूदा कमी से निपटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
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