गुजरात के नरोदा गाम में हुई हिंसा को लेकर आज गुजरात के अहमदाबाद के एक विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री माया कोडनानी, बाबू बजरंगी, जयदीप पटेल समेत 67 आरोपियों को बरी कर दिया है। दरअसल, 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद शहर के नरोदा गाम इलाके में सांप्रदायिक हिंसा में 11 लोग मारे गए थे। इस मामले में 86 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज है। हालांकि, 86 में से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है।
गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से लौट रही साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे में पेट्रोल डालकर गुजरात के गोधरा में 58 लोगों को जिंदा जला कर मार दिया गया था। इसके जवाब में उसके अगले ही दिन यानी 28 फरवरी 2002 को गुजरात बंद की घोषणा की गई थी। इस बीच अहमदाबाद शहर सहित पूरे गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे. इन दंगों में 28 फरवरी को नरोदा गांव के अंदर और बाहर कथित तौर पर 11 लोगों को जिंदा जला दिया गया था।
इन धाराओं के तहत चल रहा था केस
नरोदा ग्राम सांप्रदायिक हिंसा मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों से लैस होकर दंगा करना), 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा चल रहा था।

