भारत में कोरोना एक बार फिर अपने पैर पसारता जा रहा है लगातार केसों में इजाफा होता जा रहा है बीते सात दिनों में रोजाना सामने आने वाला कोरोना का आंकड़ा दोगुना हो गया है 30 मार्च से 5 अप्रैल के बीच भारत में कोरोना संक्रमण के 26 हजार 361 मामले सामने आए हैं। जो इससे पहले के हफ्ते (23 से 29 मार्च) में 13 हजार 274 था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार (6 अप्रैल) को जारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कोरोना 5 हजार 335 मामले सामने आए थे।
कोरोना के मामले में भारत देश में सबसे टॉप पर केरल है। बीते साल 22 सितंबर के बाद से ये पहली बार जब कोरोना के केसों में एक बार फिर से उछाल देखने को मिल रहा है। धीरे धीरे कर के कोरोना अब राजधानी दिल्ली, और यूपी के कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ने लगा है। केसों में इजाफों के साथ साथ कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। बीते सात दिनों में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 48 रहा था। जो इससे पहले के सात दिनों में 38 ही रहा था।
गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में दो, कर्नाटक में दो, केरल में एक और पंजाब में एक मौत हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकार का कहना है कि उन्होनें सभी राज्यों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है, लोंगो को मास्क लगाने का प्रोटोकॉल दोबारा फॉलो करने को कहा है। सभी राज्यों के अस्पतालों को आपात स्थिति के लिए तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
सरकार ने ये भी कहा कि इन राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक उत्तर भारत पर हमारी खास नजर है क्योंकि यहां कोरोना के केसों में तेजी से बढ़ोतरी होती नजर आ रही है। कोरोना के धीरे धीरे बढ़ते ये मामले फिर से देश के लिए चिंता का विषय बनते जा रहें हैं तीन साल बाद बड़ी मुश्किल से लोग अपनी नॉर्मल जिंदगी में वापस लौट रहे थे और अब फिर एक बार कोरोना का ये अटैक आफत बनकर अपने पैर पसार रहा है।
कोरोना के साथ साथ कई अन्य बीमारियां भी देश के लोंगो पर अटैक कर रहीं हैं। देश में इन दिनों क्रॉनिक डिसीस का भी लोग शिकार हो रहें हैं ये एक ऐसी बीमारियां जो कम से कम एक साल या उससे अधिक समय तक रहती हैं और जिनके लिए लगातार इलाज की जरूरत होती है। डायबिटीड, कैंसर, हृदय रोग और किडनी डिसीस जैसी क्रॉनिक बीमारियां पूरी दुनिया में लोगों की मौतों का प्रमुख कारण हैं।
कोरोना के बाद सबसे ज्यादा जो बीमारी देखने को मिल रही है वो है मानसिक बीमारी ”चिंता, अवसाद, याददाश्त और कॉन्सनट्रेशन से जुड़ी समस्याएं कोरोना के बाद कॉमन हुईं हैं जिससे क्वॉलिटी ऑफ लाइफ खराब हुई है। तनाव, अलग-थलग रहना, कोरोना के बाद कॉमन हुईं हैं जिससे क्वॉलिटी ऑफ लाइफ खराब हुई है। तनाव, अलग-थलग रहना, कोरोना में करीबियों को खो देना और आर्थिक संकट ने इन बीमारियों को बढ़ाने का काम किया है।
कोरोना ने देश में 3 साल अपने प्रकोप से लोंगो की हेल्थ पर काफी असर डाला खासतौर पर लोंगो के इस बीमारी से सांस से जुड़ी समस्या देखी गईं। लगातार खांसी, सांस की तकलीफ, सीने में जकड़न जैसी परेशानियों की भी वजह कोरोना बना।
देश में लगातार बढ़ते मामले को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया शुक्रवार (7 अप्रैल) को कोरोना की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ बैठक कर सकते हैं जिससे कोरोना से निपटने के लिए आगे सभी तैयारियों के पुख्ता इंतजाम पहले से समय रहते किए जा सकें।

