CJI BR Gavai Health: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति बी.आर. गवई को हाल ही में संक्रमण के चलते दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। समाचार सूत्रों के अनुसार, उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और उनकी सेहत में लगातार सुधार देखा जा रहा है।
हालांकि संक्रमण की प्रकृति और कारण के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि न्यायमूर्ति गवई की तबीयत अब स्थिर है, और संभावना है कि वे एक-दो दिन में अस्पताल से छुट्टी लेकर पुनः अपने कार्यभार को संभाल लेंगे।
हाल ही में हैदराबाद में हुए थे शामिल
इससे पहले 12 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश गवई ने हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि और वक्ता के रूप में शिरकत की थी। इसी कार्यक्रम में उन्होंने एक विशेष डाक आवरण (Special Postal Cover) जारी किया, जिसका शीर्षक था “बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अंबेडकर – संविधान सभा – भारत का संविधान”।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने “भारत के संविधान में कला और कैलीग्राफी” पर आधारित आर्ट पोस्टकार्ड्स का भी विमोचन किया, जिसमें भारतीय संविधान की सौंदर्यात्मक प्रस्तुति और अंबेडकर के योगदान को रेखांकित किया गया।
डाक आवरण में डॉ. अंबेडकर के योगदान को दी श्रद्धांजलि
सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तेलंगाना के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल पी. वी. एस. रेड्डी ने यह विशेष डाक आवरण न्यायमूर्ति गवई को सौंपा। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा, तेलंगाना हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल, और राज्य के महाधिवक्ता ए. सुधर्शन रेड्डी भी उपस्थित रहे।
इस विशेष डाक सामग्री में डॉ. अंबेडकर के जीवन, संविधान निर्माण में उनके योगदान, और भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए डाक टिकटों व स्मारक सिक्कों की झलक प्रस्तुत की गई है।
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई का परिचय
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने 14 मई 2025 को भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वे न्यायमूर्ति के.जी. बालकृष्णन के बाद दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश बने हैं। महाराष्ट्र के अमरावती जिले से संबंध रखने वाले गवई का कार्यकाल 14 मई 2025 से 24 नवंबर 2025 तक रहेगा, जब वे सेवानिवृत्त होंगे।
उनके पिता, न्यायमूर्ति रामकृष्ण सूर्यभान गवई, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के संस्थापक रहे हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए 1998 में अमरावती से लोकसभा सांसद के रूप में चुने गए थे।
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