Chennai News: तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) प्रमुख और अभिनेता विजय ने दिल्ली में विपक्षी सांसदों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसद संसद से चुनाव आयोग तक मार्च कर रहे थे। उनका उद्देश्य था की बिहार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की मांग।
विजय ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव “लोकतंत्र की नींव” हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सर्वसम्मति से होनी चाहिए, ताकि जनता का विश्वास चुनावी प्रक्रिया में बना रहे। उन्होंने दावा किया कि TVK तमिलनाडु की पहली राजनीतिक पार्टी है जिसने बिहार वोटर लिस्ट संशोधन को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया।
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा पर जोर
अभिनेता विजय ने याद दिलाया कि दिसंबर 2024 में ही उन्होंने चेताया था कि लोकतंत्र तभी सुरक्षित रहेगा जब संविधान की रक्षा की जाएगी और हर नागरिक इस जिम्मेदारी को निभाएगा। उन्होंने कहा, “यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि चुनाव ऐसे हों जो सभी में भरोसा जगाएं और निष्पक्षता का अहसास कराएं।”
इसी दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बिहार में 1 लाख से अधिक फर्जी वोट बनाए गए हैं। उनके अनुसार, डुप्लीकेट एंट्री, नकली और अवैध पते, एक ही पते पर बड़ी संख्या में दर्ज मतदाता, अमान्य फोटो और फॉर्म 6 के दुरुपयोग के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ी की गई। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की ओर से शपथपत्र की मांग ठुकरा दी और कहा कि सांसद के रूप में संविधान की शपथ लेकर दिया गया उनका बयान ही पर्याप्त है।
रणनीतिक चुप्पी और राजनीतिक समीकरण
हालांकि, विजय ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए और चुनावी सुधार की मांग का समर्थन करते हुए भी, राहुल गांधी के हालिया “माधवपुरा” फर्जी वोट मामले के आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुप्पी एक रणनीतिक कदम हो सकती है, ताकि वे विवादास्पद दावों से दूरी बनाए रख सकें।
विजय 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में अपने राजनीतिक पदार्पण की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि DMK उनका “राजनीतिक दुश्मन” और BJP उनकी “वैचारिक दुश्मन” है, इसलिए BJP से किसी भी तरह का गठबंधन संभव नहीं। हालांकि, उन्होंने AIADMK पर सीधा हमला करने से परहेज किया है, जिससे यह अटकलें तेज हैं कि चुनाव के नजदीक आते-आते वह इस पार्टी के साथ गठबंधन का विकल्प खुला रख सकते हैं।
Vijay की कार्रवाई
विजय का हालिया बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर उठाया गया कदम प्रतीत होता है। विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी पर नाराज़गी जताकर उन्होंने यह संदेश दिया कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के मुद्दे पर विपक्ष के साथ खड़े हैं। इस रुख से उन्होंने खुद को जनता के बीच एक लोकतंत्र समर्थक और संवैधानिक मूल्यों का पक्षधर नेता के रूप में पेश किया है।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग करते हुए विजय ने अपनी छवि को एक “साफ-सुथरे” और “ईमानदार राजनीति” के प्रतीक के रूप में मजबूत करने की कोशिश की है। वहीं, राहुल गांधी के फर्जी वोट के आरोपों पर उन्होंने चुप्पी साधी, जो यह दर्शाता है कि वे विवादास्पद और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। यह रणनीति उन्हें अनावश्यक राजनीतिक टकराव से बचा सकती है।
DMK और BJP पर खुलकर साधा निशाना
गठबंधन की राजनीति को लेकर विजय का रुख काफ़ी रोचक है। उन्होंने DMK और BJP पर खुलकर निशाना साधा, लेकिन AIADMK की सीधी आलोचना करने से बचते रहे। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में, यदि राजनीतिक परिस्थितियाँ बदलती हैं, तो वे AIADMK के साथ गठबंधन की संभावना को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहते।
फर्जी वोटर लिस्ट के मुद्दे पर विजय का बयान स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वे मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा मानते हैं। इस तरह, वे खुद को ईमानदार चुनाव प्रक्रिया के प्रबल समर्थक के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके आगामी राजनीतिक अभियान के लिए एक मजबूत आधार बन सकता है।
हमारी इंटर्न सुनिधि सिंह द्वारा लिखित
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