दिल्ली नगर निगम मेयर के डिप्टी पद के लिए आज वोट डाले गए। दिल्ली नगर निगम का चुनाव दो माह के भीतर दूसरी बार हुआ लेकिन भाजपा ने चुनाव से पहले ही हार मानते हुए अपने मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया और डॉ शैली ओबरॉय को निर्विरोध मेयर घोषित कर दिया गया है। एक बार फिर दिल्ली नगर निगम की मेयर शैली ओबरॉय बन गई हैं।
भाजपा की उम्मीदवार शिखा राय ने कहा, ‘सबसे बड़ी पार्टी की तरफ से मैंने उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था, लेकिन हमारी पार्टी का ध्येय यह नहीं रहता है कि हमें केवल सत्ता चाहिए। पिछले दिनों हम उम्मीद कर रहे थे कि स्टेंडिंग कमेटी चुनाव भी होगा। लेकिन कोर्ट में यह मामला लंबित है और उसमें डेट पर डेट लिया जा रहा है। इसलिए जब तक बाकी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, मैं यह मांग करते हुए कि कमेटी का गठन हो, अपना नाम वापस लेती हूं।’
भाजपा के नामांकन वापस लेने से आप पार्टी और सीएम केजरीवाल के लिए तो जैसे लॉटरी सी लग गई। डॉ शैली ओबेरॉय निर्विरोध मेयर घोषित की गईं और आले मोहम्मद इकबाल ने दूसरी बार डिप्टी मेयर का चुनाव जीता। सीएम केजरीवाल ने दोनों के जीतने पर शुभकामनाएं दी और ट्विट कर लिखा- ‘इस बार निर्विरोध मेयर और उप मेयर बनने पर शैली और एले को बधाई। दोनों को शुभकामनाएं। लोगों को हमसे काफी उम्मीदें हैं, उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कड़ी मेहनत करें।’
मेयर चुनाव जीतने के बाद AAP नगर निगम प्रभारी दुर्गेश पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि, आज पहली बार मोदी जी की भाजपा ने केजरीवाल की आप के सामने सरेंडर कर दिया। इनमें मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव लड़ने की भी क्षमता नहीं रही। एक हफ्ते से इनका सरेंडर सप्ताह चल रहा है।’
दुर्गेश पाठक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए ये भी कहा कि भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन के बाद हमारे पार्षदों को 10-10 करोड़ तक का ऑफर दिया गया। हमारे पार्षदों को तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस तक का सहारा लिया गया। लोकतंत्र में इससे ज्यादा गिरी हुई हरकत कोई नहीं कर सकता है। आज इन्हें पता था कि इनके पास नंबर नहीं है और हो सकता था कि कई भाजपा पार्षद AAP को वोट देते।
दिल्ली नगर निगम का चुनाव दो माह के भीतर दूसरी बार हुआ। ऐसा डीएमसी एक्ट के मुताबक हुआ। डीएमसी एक्ट में हर साल चुनाव कराने का प्रावधान है। हर साल 31 मार्च को मेयर का कार्यकाल समाप्त हो जाता है। नये मेयर का चुनाव नया वित्तीय शुरू होने के बाद अप्रैल में कराना होता है। यही वजह है कि दो माह के अंदर दूसरी बार मेयर का चुनाव हुआ है। दरअसल, दिल्ली नगर निगम का चुनाव देर से होने के कारण पहले साल के दौरान चुने गए मेयर का कार्यकाल दो माह से कम कर रहा।

