बिहार सरकार ने राज्य में बढ़ी बिजली की दरों से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। बिहार विधानसभा में शुक्रवार को राज्य सरकार ने साफ कर दिया कि बढ़ी बिजली की दरों का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। राज्य सरकार खुद ही बढ़े बिजली दर का बोझ उठाएगी। इसके लिए 13114 करोड़ की सब्सिडी जारी की गई है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में जानकारी दी है कि पहले बिजली सब्सिडी में 8895 करोड़ रुपये दिए जाते थे। 2023-24 के लिए सब्सिडी के रूप में 13114 करोड़ की राशि जारी की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष के हंगामे के बाद इसका ऐलान किया। साथ ही कहा कि सभी को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ी हुई दरें एक अप्रैल से ही लागू होनी थी। इसलिए हमने आज ही सब्सिडी देने का फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सबसे अमीर राज्य महाराष्ट्र को जिस दर पर बिजली मिलती है उससे भी ज्यादा महंगी बिजली बिहार को मिल रही है। हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि सभी राज्यों को एक ही रेट पर बिजली उपलब्ध करवाई जाए।
चार सालों से बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में बताया कि लगातार चार सालों से बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। पांचवें साल विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली वृद्धि का फैसला दिया था। अभी बिजली कंपनियों को केंद्र सरकार चलाती है। जब हम चलाते थे तो कभी कोयला नहीं मिलता था, कभी रेल नहीं मिलता था। फिर हम लोगों ने केंद्र को ही कंपनी चलाने की अनुमति दी है। हम उससे बिजली खरीदते हैं।
केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि अब जब ‘एक देश एक टैक्स’ लगता है तो फिर ‘एक देश एक टैरिफ रेट’ क्यों नहीं लिया जा रहा है। मंत्री ने आगे कहा कि बिहार को सबसे ज्यादा दर पर बिजली दी जा रही है। विपक्षी लोग हल्ला कर रहे थे कि सरकार ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर दी लेकिन हमारे मुख्यमंत्री ने एक साथ 13 हजार करोड़ की सब्सिडी देने का फैसला लिया है। यह बहुत बड़ा निर्णय है।

