उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बहराइच के महाराजगंज कांड में कार्रवाई अब तेज हो गई है। बहराइच हिंसा में पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत 31 लोगों को आदालत के सामने पेश किया है, तो वहीं जज ने इन सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेरने के लिए रवाना कर दिया गया है। इन 31 में से पांच मुख्य आरोपी हैं: जिनका नाम, अब्दुल हमीद, मोहम्मद अफजल, मोहम्मद तालिब, और मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होने के बाद मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद फहीम है। तो वहीं, सुरक्षा के मद्देनजर सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा में उन्हें जिला कारागार में भेज दिया गया।
आरोपी के घर चिपका PWD का नोटिस
इस बीच महाराजगंज कांड के मुख्य आरोपित अब्दुल हमीद के घर पीडब्ल्यूडी ने नोटिस चिपका दिया है। पीडब्ल्यूडी का कहना है कि जिला मार्ग पर रूरल एरिया में मार्ग के मध्य बिन्दु से 60 फुट की दूरी के अंदर बिना विभागीय अनुमति के कोई भी निर्माण अवैध की श्रेणी में आता है। तो वहीं नोटिस का जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। ऐसे में इन सब को देखते हुए यह माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में यहां बुलडोजर की कार्रवाई हो सकती हैं।
अफसरों पर भी कार्रवाई हुई तेज
देखा जाए तो दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस को लेकर महाराजगंज में हुये उपद्रव के बाद आरोपियों के साथ साथ अब अफसरों पर कार्रवाई तेज हो गई है। आपको बता दें कि महसी सर्किल के सीओ रुपेन्द्र गौड़ निलंबित हो चुके है। जिला सूचना अधिकारी गुलाम वारिस को बहराइच से हटाकर मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया है। लापरवाही सामने आने पर तहसीलदार महसी रविकांत द्विवेदी को हटा दिया गया है, नायब तहसीलदार सौरभ सिंह को तहसील का चार्ज सौंपा गया है। इस हिंसा के बाद से लगातार योगी सरकार सख्त एख्शन लेती हुई दिखाई दे रही है.
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परिजनों ने एनकाउंटर पर उठाए सवाल
बता दें कि महाराजगंज कांड में मृतक 22 वर्षीय युवक रामगोपाल मिश्रा के परिजन ने पुलिस के आरोपियों के हुए एनकांडटर पर सवाल खड़ा कर रहे है। मृतक के पिता कैलाश और पत्नी ने कहा कि पीड़ित परिवार के साथ पुलिस ने न्याय नहीं किया है और पुलिस ने एनकाउंटर की जो कार्रवाई की है, उससे रामगोपाल के परिजन संतुष्ट नहीं है।
सपा ने की न्यायिक जांच की मांग
इस मामले को लेकर सपा पार्टी योगी सरकार पर हमलावर होती दिखाई दे रही है. बता दें कि बहराइच हिंसा को लेकर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रामहर्ष यादव की अगुवाई में ज्ञापन डीएम मोनिका रानी को कलेक्ट्रेट में सौंपा गया है। तो वहीं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में जिलाध्यक्ष ने बताया कि प्रशासनिक अक्षमता व राजनीतिक साजिश के तहत दंगा करवाया गया है। पीड़ितों को न्याय दिलाने और दंगे के न्यायिक जांच की मांग। जिलाध्यक्ष ने कहा कि जिनके मकान जले है, उन्हें सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाए।

