सोमवार शाम को इस श्रावण मास के पहले सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी महाकाल मंदिर से धूमधाम से निकली। परंपरागत मार्ग से सवारी शिप्रा तट पहुंची। यहां पूजन पश्चात सवारी पुन: मंदिर पहुंची। मार्ग में लाखो भक्तों ने बाबा की एक झलक पाकर स्वयं को धन्य महसूस किया। इंद्र देवता भी बाबा के पैर पखारने उपस्थित हुए।
शाम 4 बजे महाकाल मंदिर के कोटितीर्थ परिसर स्थित सभागृह में बाबा महाकाल के मनमहेश मुखारविंद को विराजीत किया गया। शासकीय पुजारी पं.घनश्याम शर्मा ने बाबा का पूजन किया। पश्चात महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष सह कलेक्टर कुमार पुरूषोत्तम ने सपत्निक बाबा महाकाल का पूजन एवं आरती की। इसके बाद बाबा की पालकी को मुख्य द्वार पर लाया गया। यहां गार्ड ऑफ ऑनर हुआ।
पश्चात सशस्त्र पुलिस बल के मार्चपास्ट के साथ पुलिस बैण्ड की सुमधुर धुन पर बाबा नगर भ्रमण पर निकले। मार्ग के दोनों ओर,मकानों पर लाखो श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। सवारी कोट मौहल्ला चौराहा,गुदरी,बक्षी बाजार,कहारवाड़ी होकर शिप्रा तट पहुंची। यहां भी हजारों श्रद्धालु रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर बाबा के दर्शन के लिए उपस्थित थे। मां शिप्रा का मंदिर की ओर पूजन किया गया। इसी प्रकार भगवान का जलाभिषेक शिप्रा के जल से किया गया। इस दौरान दत्त अखाड़ा घाट से पीर महंत द्वारा परंपरागत पूजन किया गया।