तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की पिटाई की कथित फर्जी वीडियो फैलाने के मामले में जेल में बंद बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू की जांच में यह खुलासा हुआ है कि मनीष कश्यप और फरार चल रहे इसके साथी मणि द्विवेदी ने जिस कंपनी को पहले घाटे में दिखाया उसी कंपनी से इन दोनों ने लाखों रुपये सैलरी के रूप में लिए है। बता दें कि दूसरी ओर तमिलनाडु फर्जी वीडियो वायरल करने के मामले में बिहार पुलिस को एक और सफलता मिली है। बिहार पुलिस ने यूट्यूबर मनीष कश्यप के दोस्त नागेश कश्यप को पटना से गिरफ्तार कर लिया है।
मोटी सैलरी उठाने के मामले में ईओयू ने किया बड़ा खुलासा
बता दें कि कंपनी को घाटे में दिखाकर मोटी सैलरी उठाने के मामले में ईओयू ने बड़ा खुलासा किया है। ‘सचतक’ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मनीष कश्यप और मणि द्विवेदी द्वारा बनाई हुई कंपनी है। इस कंपनी में मनीष मैनेजिंग डायरेक्टर तो वही मणि द्विवेदी डायरेक्टर के पद पर है। जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि साल 2021-22 के फाइनेंशियल ईयर में इन दोनों ने शातिर गिरी कर इस कंपनी को पहले 6.50 लाख रुपये के घाटे में दिखाया और फिर लाखों रूपए सैलरी के रूप में कंपनी से लिए। इन दोनों ने अपनी सैलरी के नाम पर कंपनी से अब तक 40 लाख रुपये लिए है। यह बात अब तक की छापेमारी और पड़ताल में ईओयू के हाथ लगे कागजातों से साबित हुई है।
मनीष कश्यप और मणि द्विवेदी ने रुपयों की हेराफेरी सिर्फ अपने नाम पर ही नहीं की है। इन्होंने कंपनी के स्टाफ के नाम पर भी की है। जांच में पता चला है कि 12 लाख रुपये स्टाफ की सैलरी के नाम पर कंपनी से उठाए गए हैं। इनकी कंपनी में स्टाफ की कुल संख्या क्या है? इसका पता लगाया जा रहा है। रुपये की हेराफेरी को लेकर अब ईओयू कंपनी से जुड़े बैंक अकाउंट को खंगालेगी। अपनी जांच के जरिए यह भी पता करेगी कि कंपनी के अकाउंट में फेसबुक और यूट्यूब के जरिए कितने रुपये अब तक आए हैं।

