बिहार के पूर्व सांसद और बाहुबली आनंद मोहन को रिहा किए जाने को लेकर 8 मई को देश के सर्वोच्य अदालत सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। दरअसल साल 1994 में भीड़ द्वारा गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या कर दी गयी थी। जिसका आरोप बाहुबली आनंद मोहन पर लगा था। जिसके बाद अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी लेकिन बाहुबली ने अदालत के इस फैसले को चुनौती दी और सजा आजीवन उम्रकैद में बदल दिया गया लेकिन पिछले दिनों बिहार सरकार ने जेल मैन्युअल में संशोधन कर आनंद मोहन समेत 27 लोगों को जेल से रिहा कर दिया।
अब दिवंगत जिलाधिकारी जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग भी की है। उमा कृष्णैया की ओर से वकील तान्याश्री के जरिये दायर याचिका में आनंद मोहन की रिहाई को रद्द कर उसे फिर से जेल भेजे जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि आनंद मोहन की रिहाई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत है। आनंद मोहन की रिहाई का फैसला गलत तथ्यों के आधार पर लिया गया है। जिसके बाद कोर्ट ने 8 मई को सुनवाई का आदेश दिया है।

