बाहुबली नेता और बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन आज सुबह 4 बजे सहरसा जेल से रिहा हो चुके है आपको बता दें की गोपालगंज के जिलाधिकारी जी.कृष्णैया की हत्या के आरोप में पूर्व सांसद आनंद मोहन को पटना उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2008 में उम्र कैद की सजा सुनाई थी,जिसके लिए रात में ही सारी कागजी प्रक्रिया पूरी कर दी गई थी। और अब 16 साल बाद आनंद मोहन नितीश सरकार में जेल से बाहर आए हैं।
दरअसल गोपालगंज के जिलाधिकारी जी कृष्णैया 5 दिसंबर 1994 को हाजीपुर से गोपालगंज लौट रहे थे इसी दौरान मुजफ्फरपुर में आनंद मोहन के समर्थक DM की गाड़ी को देखते ही उन पर टूट पड़े। पहले उन्हें पीटा गया, फिर गोली मारकर हत्या कर दी थी।
आपको बता दें 26 अप्रैल को उन्होंने 15 दिन की पैरोल खत्म होने के बाद सरेंडर किया था। पैरोल सरेंडर होते ही जेल में रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। वहीं, बाहुबली आनंद की रिहाई को भव्य बनाने की तैयारी है। बाहुबली के समर्थक बाहर निकलने के बाद वे 15 से 20 किमी तक रोड शो भी करेंगे।
सिर्फ इतना ही नहीं बाहुबली नेता की रिहाई के मामले में नितीश सरकार की काफी आलोचना भी हो रही है, इस बीच नीतीश सरकार के फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गई है और बिहार सरकार की अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की गई है।
आनंद मोहन की रिहाई पर डीएम जी कृष्णैया की बेटी और पत्नी ने नाराज़गी जताई है जिन्होंने हैदराबाद में बताया की नीतीश सरकार को अपने फैसले पर फिर से सोच विचार करना चाहिए,सरकार ने ऐसा करके एक गलत उदाहरण पेश किया है और यह भी बोला की यह सिर्फ एक परिवार के साथ नहीं बल्कि पूरे देश के साथ अन्याय है|
इतना कहते हुए जी कृष्णैया की बेटी ने आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ अपील करने की भी बात कहीं है, उन्ही के साथ डीएम पत्नी ने भी अपने विचार रखते हुए बताया कि ऐसा वोट बैंक की राजनीति के लिए किया जा रहा है,क्यूँकि पहले दोषी को फांसी की सजा हुई थी, फिर उसे उम्रकैद में बदल दिया गया। अब सरकार उसकी रिहाई करा रही है। यह बिलकुल भी सही नहीं हैं |
इसी के साथ इंडियन आईएएस एसोसिएशन ने भी बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई पर विरोध जताया है उनका कहना है की वो इसके खिलाफ कोर्ट जायेंगे
साथ ही दलित संगठन भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। संगठन ने कहा कि सरकार ने अपराधियों को बचाने के लिए कानून कर गलत काम किया है।
अब आपको बताते है की आनंद मोहन की जल्द रिहाई आखिर हुई कैसे दरअसल जेल नियमावली 2012 में नितीश सरकार ने एक संशोधन किया है जिसके चलते इस नियमावली से सरकारी कर्मचारी के हत्यारे केटेगरी को अब हटा दिया गया है साथ ही 10 अप्रैल को इसे लेकर राज्य के गृह विभाग द्व्रारा एक नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था जिसके बाद आनंद मोहन की रिहाई पर भी मुहर लग गयी।

