प्रयागराज में जिस माफिया अतीक की तूती बोला करती थी 15 अप्रैल को उसे और उसके भाई अशरफ को गोलियों से भून दिया गया और मौत की नींद सुला दिया। 16 अप्रैल को दोंनो का पोस्टमार्टम हुआ और प्रयागराज के कसारी मसारी कब्र में माफिया अतीक और अशरफ को खाक-ए-सुपुर्द कर दिया। इसके बाद से इस डबल मर्डर केस में कई नए एंगल सामने आ रहें है। अतीक की गैंग का सबसे खास गुर्गा बमबाज़ गुड्डू मुस्लिम अभी भी पुलिस के हाथ से फरार चल रहा है उसकी आखिरी लोकेशन कर्नाटक में मिली थी।
गुड्डू मुस्लिम इस पूरे मामले की वो कड़ी है जो काफी कुछ जानता है। मौत से पहले अशरफ ने भी आखिरी शब्द मेन बात ये है कि गुड्डू मुस्लिम बोले थे जिसके बाद से सारी सुईयां बमबाज़ गुड्डू मुस्लिम पर ही घूम रहीं हैं। अब आपको बताते हैं कि इसका नाम बमबाज़ गुड्डू मुस्लिम कैसे पड़ा। दरअसल गुड्डू मुस्लिम को बम बनाने का एक्सपर्ट माना जाता है। सूत्रों का दावा है कि गुड्डू मुस्लिम ही अतीक अहमद का पूरा नेटवर्क चलाता था।
उमेश पाल के मर्डर का अगर आपने सीसीटीवी वीडियो फुटेज देखा है तो एक शख्स पर आपकी नजर जरूर टिकी होगी जो हाथ में एक झोला लिए हुए हैं और बड़े ही आराम से वह झोले से बम निकालकर फेंकता नजर आया था। बदमाशी उसका शौक था। बाद में यही आगे चलकर उसका प्रोफेशन भी बन गया। स्कूल के दिनों से ही वह लूट और रंगदारी का काम करने लगा था। इसी दौरान वह एक के बाद एक कई बदमाशों और अपराधियों के संपर्क में आने लगा।
बताया जाता है कि इसी समय से वह बम बनाने लगा, लेकिन उसकी बढ़ती बदमाशी से उसके घरवाले परेशान थे और उसे पढ़ाई करने के लिए लखनऊ भेजा। लेकिन यहां गुड्डू मुस्लिम अपराध करना शुरू कर दिया और इस दौरान उसकी मुलाकात पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के दो बाहुबलियों से हुई। बाहुबली अभय सिंह और धनंजय सिंह दोनों ही लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते थे।
अपराध की दुनिया में गुड्डू की मुलाकात एक समय पर यूपी के खूंखार और चर्चित माफिया श्रीप्रकाश शुल्का से हुई। गुड्डू समय के साथ श्रीप्रकाश शुक्ला का करीबी हो गया। गुड्डू श्रीप्रकाश शुक्ला को अपना गुरू मानने लगा। लेकिन जब श्रीप्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर हो गया तो गुड्डू गोरखपुर के माफिया परवेज टाडा के संपर्क में आया। परवेज पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम करता था। परवेज यहां नकली नोटों की तस्करी के लिए कुख्यात था।
परवेज ने ही गुड्डू की मुलाकात श्रीप्रकाश शुक्ला से कराई थी। गुड्डू परवेज के लिए बम बनाता था। इसके बाद परवेज के जरिए ही गुड्डू की मुलाकात बिहार के चर्चित माफिया उदयभान सिंह से हुई। इसके बाद एक तरफ जहां गुड्डू को पुलिस ढूंढ रही तो गुड्डू बिहार भाग गया और उदयभान के लिए काम करने लगा। बिहार में भी गुड्डू ने कई कांड किए।
साल 2001 तक गुड्डू पर कई मुकदमें दर्ज हो चुके थे और यूपी पुलिस को गुड्डू की तलाश थी। इसी कड़ी में गोरखपुर पुलिस ने गुड्डू को पटना में गिरफ्तार किया। ऐसा बताया जाता है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद प्रयागराज के माफिया अतीक अहमद ने ही उसे जेल से छुड़ाया था। जेल से निकलने के बाद गुड्डू अतीक अहमद का खास बन गया और अतीक के लिए काम करने लगा। इसके बाद वह अतीक के इशारे पर बड़े बड़े कारनामें करने लगा और पूरे गैंग की जिम्मेदारी भी संभालने लगा। अतीक अहमद के अधूरे काम को पूरा करना ही गुड्डू का अंतिम लक्ष्य बन गया।
माफिया अतीक और अशरफ की मौत के बाद से एक चिट्ठी को लेकर भी कईं बातें सामने आ रहीं हैं, उस चिट्ठी को अशरफ ने लिखा था और अपनी मौत की आशंका जताते हुए उस शख्स का नाम लिखा था जो उसकी हत्या कर सकता है। अतीक अहमद के वकील विजय मिश्रा ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वो जब अशरफ से जेल मिलने पहुंचे थे तो उन्होंने उस व्यक्ति के बारे में अशरफ से पूछा था, इस पर अशरफ ने नाम नहीं बताया था।
अशरफ ने कहा था कि वो नाम चिट्ठी में लिखा हुआ है, चिट्ठी बंद लिफाफे में हैं और उसे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा। विजय मिश्रा ने बताया कि वो चिट्ठी जा चुकी है, वो पहुंच चुकी होगी या पहुंच रही होगी। सूत्रों ने बताया कि अतीक और अशरफ के परिवार के करीबी लोगों के पास वो चिट्ठी रखी गई थी और वहीं से उसे भेजा गया था। इस चिट्ठी के बारे में तीन लोगों को अच्छे से पता है कि उसमें किसका नाम है वो हैं अशरफ उसकी बेगम जैनब और वकील विजय मिश्रा जैसे ही चिट्ठी खुलोगी तो राज सामने आ जाएगा कि पूरे खेल का मास्टमाइंड कौन है।
वहीं माफिया अतीक और अशरफ को मौत की घाट उतारने वाले तीनों आरोपियों को प्रयागराज की जेल से शिफ्ट कर के प्रतापगढ़ की जेल भेज दिया गया है क्योंकि अतीक का बेटा अली प्रयागराज जेल में बंद है तो सुरक्षा को देखते हुए ऐसा किया गया है।

