आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर देश में सियासत तेज हो गयी है। चुनाव की तपिस धीरे धीरे बढ़ने लगी है। कई राज्यों में इस साल और लोकसभा चुनाव से पहले विधानसभा का चुनाव होना है। जिसे सभी राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव के सेमी फाइनल के तौर पर देख रही है। सभी पार्टियां अपना दम ख़म दिखने में जुट गयी है। बिहार की राजनीति अभी सबसे ज्यादा गर्म नजर आ रही है।
कल यानी बीते बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर आए थे। बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी दिल्ली में ही मौजूद थे। जहाँ दोनों ने विपक्षी दलों से मुलाकात की। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खड़गे और पूर्व सांसद राहुल गाँधी से मुलाकात की। इसके अलावा नीतीश कुमार ने हाल ही में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने वाली आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। यह मुलाकते सिर्फ औपचारिक नहीं है। यह आगामी लोकसभा चुनाव के तैयारियों के मद्देनजर की गयी मुलाकतें है। ऐसा माना जा रहा है कि नीतीश कुमार विपक्षी दलों को लामबंद करना चाहते है।
राजनीतिक गलियारे में चर्चा हुई तेज
अब इसके बाद आज बिहार के मुख्यमंत्री रहे जीतन राम मांझी ने भाजपा नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। अब इसके कई मायने निकाले जा रहे है। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ जाने की चर्चा तेज हो गयी है। कहा जा रहा है कि मांझी महागठबंधन का साथ छोड़ कर भाजपा के साथ हांथ मिला सकते है। हालाँकि हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा है कि अमित शाह से उनकी मुलाकात गैर राजनीतिक थी। वह माउंटेन मैन दशरथ मांझी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग को लेकर शाह से मिलने दिल्ली आए थे।
हालांकि जानकारों का मानना है कि मांझी की यह मुलाकात राजनीतिक भी थी। लोकसभा चुनाव से पहले वह पाला बदल सकते हैं। क्योंकि बिहार की महागठबंधन सरकार में वे खुश नहीं हैं।

