सियासत एक ऐसा शब्द जिसे पाने के लिए पार्टियां ऐड़ी चोटी का जोर लगाती हैं और बात जब चुनाव की आ जाए तो सब ऐसे सामने आ जातें है कि उनसे बेस्ट कोई है ही नहीं। ठीक ऐसा ही माहौल देश में इन दिनों चल रहा है साल 2024 के चुनाव को लेकर भाजपा और विपक्ष में पहले ही जुबानी वॉर जारी है, लेकिन तमिलनाडू की सियासत में तो दूध को लेकर भाजपा और कांग्रेस में उबाल शुरू हो चुका है।
सियासत की लड़ाई दूध में नजर आने लगी है। एक आम आदमी की दैनिक जरूरत दूध को लेकर सियासी वॉर होना शुरू हो चुका है। दरअसल तमिलनाडू में नंदिनी दूध नाम की बिक्री होती है लेकिन भाजपा ने यहा अमूल दूध की एंट्री करवाई तो कांग्रेस ने इस पर विरोध करते हुए युद्ध छेड़ दिया। कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी अपना शासन हर जगह स्थापित करने के लिए ये कूटनीति तरह के गेम खेल रही है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी नंदिनी दूध को खत्म करने के लिए ये साजिश रच रही है।
अब बीजेपी सत्ता पक्ष में पूरी पॉवर में देश में अपना झंडा गाढ़े हुए तो चुप रहने वालों में से तो हा नहीं। कांग्रेस के इस विरोध का भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि अमूल से नंदिनी को कोई खतरा नहीं है। सरकार नंदिनी को देश का नंबर-1 ब्रैंड बनाएगी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि अकेले कांग्रेस ही नहीं अन्य पार्टियां भी इस फैसले का विरोध कर रही हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि भाजपा महाभारत का चक्रव्यूह रचकर अपना राज बनाने के लिए ऐसी साजिशें रच रही है। सरकार ऐसे कदम उठाकर किसानों की मदद नहीं कर रही है बल्कि उनके लिए मुसीबतें और भी ज्यादा बढ़ाती चली जा रही है। शिवकुमार ने कहा कि नंदिनी दूध अमूल से ज्यादा बेहतर है, तमिलनाडू के लोग इस ब्रांड के दूध पर काफी सालों से भरोसा करते हैं हमें गुजरात के दूध की जरूरत नहीं है।
हम चाहते हैं कि हमारे अधिकार, हमारी जमीन, हमारी मिट्टी, हमारा पानी और हमारा दूध सुरक्षित रहे। मेरे किसानों को अच्छी कीमत मिलनी चाहिए। नंदिनी हमारी शान है, हमारे लोग वे नंदिनी से प्यार करते हैं। हर राज्य की अपनी अलग संस्कृति और परंपरा होती है। हमें अपने किसानों की रक्षा करने की जरूरत है। वहीं कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने आरोप लगाते हुए कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नंदिनी ब्रांड को बंद कराना चाहते हैं, जो कर्नाटक के किसानों की जीवन रेखा है।
राज्य पर अमूल ब्रांड थोपा जा रहा है। कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने लोगों से अमूल उत्पादों का बहिष्कार करने का भी आग्रह किया था। अमूल का यह बहिष्कार सोशल मीडिया पर भी शुरू हो गया है। ट्विटर पर शनिवार को #GoBackAmul और #SaveNandini ट्रेंड करने लगा।

