“खइके पान बनारस वाला” अब आप सोच रहें होंगे कि खबरों के बीच में ये गाना हमें क्यों याद आया दरअसल बनारस के मीठे और रसीले पान ने धूम मचा दी है उसे GI टैग (geographical index Tag) मिल गया है। बनारस के पान के साथ साथ लंगड़ा आम को भी GI टैग दिया गया है। मिठास से भरी ये दोनों चीज़े ऐसी हैं कि जिनका स्वाद पूरे देश में अन्य कहीं नहीं मिलता है।
बनारस अपने घाटों की गंगा आरती, भगवान शिव की आरती, अग्नि और पूरे ब्रह्मांड की आरती को लेकर जितना पॉपुलर है। उसके साथ साथ यहां के पान की मिठास आज भी यहां (Happiness)और मेजबानी (Hosting)की निशानी माना जाता है। GI यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशंस टैग एक प्रकार का लेबल होता है, जिसमें किसी प्रोडक्ट को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है।
पान को संस्कृत के शब्द ‘पर्ण’ से लिया गया है, जिसका मतलब है पत्ती। पान का ज़िक्र भारतीय पौराणिक कथाओं के साथ-साथ आयुर्वेद की औषधियों के रूप में भी किया गया है। जालीदार शिराओं के साथ, दिल के आकार वाले पान के इस पत्ते को कई तरह के धार्मिक समारोहों में भी खास जगह दी जाती है। लगभग पांच हज़ार सालों से इसे रोज़ाना किसी न किसी रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
लेकिन क्या आप जानते हैं स्वाद और होठों को लाल रंग देने के अलावा पान के पत्ते में सेहत के कई राज़ भी छिपे हैं। इसके पत्ते खाने के बाद एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी माइक्रोबियल गुण शरीर के लिए काफी फ़ायदेमंद होते हैं। सुश्रुत संहिता, चरक संहिता और काश्यप संहिता जैसे आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ के अनुसार पान औषधीय गुणों की खान है, किसी ज़माने में दवाई के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता था।

केवल काशी के पान को ही GI टैग नहीं दिया गया यहां का बनारसी लंगड़ा आम, रामनगर भंटा (बैंगन) और चंदौली का आदमचीनी चावल शामिल हैं। GI के इस टैग में काशी ने अपना झंडा उंचा कर लिया है। यूपी भी किसी मामले में पीछे नहीं है। यूपी ने 7 अन्य ओडीओपी (odop) प्रोडक्ट्स ने भी जीआई टैग हासिल किया है। इनमें अलीगढ़ का ताला, हाथरस की हींग, नगीना का वुड कटिंग, मुज़फ़्फ़रनगर का गुड़, बखीरा ब्रासवेयर, बांदा का शज़र पत्थर क्राफ्ट, प्रतापगढ़ के आंवले को भी GI टैग प्राप्त हो गया है।

