कोरोना ने कैसे 3 साल पूरे दुनिया भर में अपना आतंक बरपाया था ये आज तक कोई भूल नहीं पाया है। अपनों ने अपनी आंखो के सामने खोते हुए देखा। पूरी दुनिया भर में कोरोना की दहशत ने बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया था कोरोना की महामारी ने नए नए वैरिएंटो ने दुनिया को खूब डराया लेकिन हर बीमारी का समय भी निश्चित होता है और वक्त के अनुसार बीमारी खत्म भी होती है।
देश में एक बार फिर कोरोना के मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा है। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Ministry of Health) ने कोविड-19 प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ बैठक की, पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब शीर्ष अधिकारियों ने राज्यों को कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी के खिलाफ चेतावनी दी। अब लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह एक और कोविड-19 का प्रकोप है? अगर है तो स्थिति कितनी भयावह होने वाली है?
27 मार्च को खत्म हुए सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 1,471 नए कोरोना के मामले सामने आए थे। ठीक एक हफ्ते पहले यह संख्या 808 थी। इसका मतलब डेली केस रेट में 82 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अभी पूरे भारत में कोविड-19 के 10 हजार 981 केस एक्टिव हैं। मतलब 10 लाख भारतीयों पर वर्तमान में कोविड से संक्रमित केवल आठ लोग हैं।
एक बार फिर कोरोना ने बजाई खतरे की घंटी
कोरोना ने जब साल 2019 से देश में एंट्री की थी उसके बाद धीरे धीरे अपने पैर पसारे थे तो लोगों ने ये सोच लिया था कि अब बीमारी के साथ ही हमें जानी पडा लेकिन साल 2021 में हालत नॉर्मल होने लगे थे लेकिन अब फिर एक बार कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर खतरे की घंटी बज गई है। डॉक्टरर्स और प्रशासन एक बार फिर अलर्ट हो गया है और लोंगो को सावधानी बरतने को कहा है।
पॉजिटिविटी रेट में आया उछाल
एक और आंकड़ा जिसकी वजह से लोगों में डर है वो पॉजिटिविटी रेट के बढ़ने को लेकर है। आंकड़ा देखें तो पिछले सप्ताह देश में परीक्षण किए गए सभी सैंपल में से औसतन 1.5 प्रतिशत लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। यह एक सप्ताह पहले 1 प्रतिशत और उससे पहले के सप्ताह में 0.6 प्रतिशत था, लेकिन यहां एक बात को ध्यान में रखने की जरूरत है। दरअसल, इस समय इन्फ्लुएंजा के मामलों में भारी उछाल देखा जा रहा है जिसने लोगों को और ज्यादा कोविड टेस्ट कराने के लिए प्रेरित किया है, दोनों ही बीमारियों के ज्यादातर लक्षण एक ही जैसे हैं। जो इस समय पॉजिटिविटी रेट को बढ़ाने के लिए एक सबसे बड़ा कारण है।

