आज नवरात्रि का आठवां दिन है इस दिन मां के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है इसको महाअष्टमी कहा जाता है और कन्याओं को पूजा जाता है और उन्हें हलवे पूरी का प्रसाद खिलाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महागौरी ने शिव प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी, कठोर तप से मां का शरीर काला पड़ गया लेकिन उसके बाद शिव के दर्शन से देवी का शरीर अत्यंत गौर हो गया और तभी से इन्हें महागौरी कहा जाने लगा।
मां गौरी श्वेत वर्ण की हैं और श्वेत पोशाक में इनका ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है। मां महागौरी की 4 भुजाएं हैं और देवी का वाहन वृषभ है, इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा गया है। नवरात्रि में महागौरी की पूजा पीले या सफेद वस्त्र धारण करके करनी चाहिए। मां के सामने दीपक जलाएं और ध्यान करें, देवी को पूजा में सफेद और पीले फूल अर्पित करें। पूजन में मां के मंत्रों का जाप करें।
या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन (Kanya Pujan 2022) के दिन कन्या और बटुक की पूजा करने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और धन-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। बता दें कि शास्त्रों में आयु के अनुसार कन्या पूजन के महत्व को भी विस्तार से वर्णित किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि इस दिन आयु के अनुसार कन्याओं को भोग लगाने से भक्तों को विशेष लाभ होता है।
कन्या पूजन में 2-10 साल तक की ही कन्याओं को निमंत्रण दें। पूजन के लिए कन्याओं की संख्या कम से कम 9 होनी चाहिए। एक बालक को भी भोजन के लिए न्यौता दे। बटुक के बिना कन्या पूजन अधूरा माना गया है, क्योंकि मां दुर्गा के साथ बटुक यानी भैरव की पूजा अनिर्वार्य है।
कन्याओं को एक दिन पहले निमंत्रण दें। घर आने पर इनके पैर धोएं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके हल्दी, कुमकुम से टीका करें। लाल चुनरी ओढ़ाएं, और भोजन के लिए आसन पर बैठाएं। कन्याओं को भोजन करवाने से पहले भोजन को जूठा न करें। ध्यान रखें भोजन सात्विक होना चाहिए। इसमें लहसून, प्याज का इस्तेमाल न करें। भोजन में हलवा, पूड़ी, खीर, सब्जी जो प्रसाद के लिए बनाया है सभी कन्याओं को खिलाएं।
इसके बाद कन्याओं को दान दक्षिणा दें, जैसे फल, श्रृंगार सामग्री, मिठाई, नारियल आदि भेंट करें इन सभी कन्याओं का आशीर्वाद लें और फिर व्रत खोलें।

