प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर देश के सर्वोच्च न्यायालय 5 अप्रैल को सुनवाई करेगा। भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने आज सोमवार को,इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन किया, जिसके बाद न्यायालय ने 5 अप्रैल को सुनवाई करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि 8 सितंबर को काशी नरेश विभूति नारायण सिंह की बेटी कुमारी कृष्ण प्रिया ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को चुनौती देने वाली नई याचिका दायर की थी। कुमारी कृष्ण प्रिया ने याचिका में कहा कि काशी रियासत के पूर्व शासक काशी में सभी मंदिरों के मुख्य संरक्षक थे, इसलिए काशी शाही परिवार के पास इस अधिनियम को चुनौती देने का अधिकार है।
एक याचिका वकील और अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर में पुजारी रहे करुणेश कुमार शुक्ला ने दायर की है। बता दें कि करुणेश शुक्ला कृष्ण जन्मभूमि मामले में मुख्य याचिकाकर्ता हैं और वह राम जन्मभूमि मामले में भी मुख्य भूमिका निभा चुके हैं। करुणेश शुक्ला के पहले प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
यह हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय को अपने पवित्र स्थलों पर पूजा करने से रोकने वाला एक्ट
वकील रुद्र विक्रम सिंह ने भी 26 मई को एक्ट के खिलाफ याचिका दायर कर कहा कि 15 अगस्त 1947 की मनमानी कटऑफ तारीख तय कर अवैध निर्माण को वैधता दी गई। याचिका में कहा गया है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा 2, 3 और 4 असंवैधानिक है। ये धाराएं संविधान की धारा 14, 15, 21, 25, 26 और 29 का उल्लंघन करती हैं। उन्होंने संविधान के प्रस्तावना का हवाला देते हुए कहा कि ये धाराएं धर्मनिरपेक्षता पर चोट पहुंचाती हैं जो संविधान के प्रस्तावना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसके अलावा प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को चुनौती देने वाली एक याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने भी दायर की है। 12 मार्च 2021 को मामले में वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर नोटिस जारी हुआ था। उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि 1991 का प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट धार्मिक स्थलों की स्थिति 15 अगस्त 1947 वाली बनाए रखने को कहता है। यह हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय को अपने पवित्र स्थलों पर पूजा करने से रोकता है।

