देशभर में होली का रंग लोगों पर चढ़ा हुआ, लोग उत्साह, उमंग में गाते झूमते त्योहार की मस्ती में रंगे हुए है। होली एक ऐसा त्योहार है जिस दिन दुश्मन भी आपस में गले लगकर सारे पुराने गिले शिकवे मिटाकर होली के रंगो में एक दूसरे के रंगकर हंसी खुशी मस्ती करते हैं।
उत्तर प्रदेश में दो ऐसी जगह हैं जहां होली का अलग ही आनंद होता है, श्रीकृष्ण का वृंदावन और राधा का बरसाना यहां होली की धूम एक हफ्ते पहले से शुरू हो जाती है, वहीं यूपी के रामनगरी अयोध्या में रंगभरी एकादशी के बाद से ही होली का शुभारंभ हो चुका है। लेकिन अयोध्या में रंगो की होली से भी ज्यादा खास होती है फूलों की होली।
इस बार फूलों की होली अयोध्या में बड़े भक्तमाल मंदिर में सैकड़ों संत महंतों ने भगवान के साथ फूलों की होली खेली, इस दौरान हारमोनियम ढोलक तबला के साथ संत महंतों ने होली के अवसर पर फगुवा गीतों का गायन किया गया। और भगवान के सामने संत महंत नाचते गाते खुशियां मनाई।
जहां वृंदावन बरसाना की होली पूरी दुनिया में प्रचलित है तो दूसरी तरफ अयोध्या की होली परंपरागत तरीके से मनाई जाती है “प्रियतम होली मनाना होगा रूठना और मनाना होगा ” यह बोल है होली के भजन के जिसे अयोध्या की परंपरा में अवध की होली कहा जाता है।
इस होली में प्रिया और प्रीतम यानी कि भगवान राम और मां सीता होली के रंग में सराबोर नजर आते हैं। भगवान के साथ भव्य तरीके से होली खेली जाती है। इस दरमियान श्रद्धालु अपने आराध्य के साथ होली खेल कर अभिभूत होते हैं और धूमधाम से नृत्य करके अपने प्रिय प्रियतम को रिझाने का प्रयास कर रहे हैं।
बड़ा भक्तमाल मंदिर के महंत अवधेश दास बताते हैं कि, बसंत पंचमी के मौके से ही रंगोत्सव शुरू हो जाता है। इसी क्रम में भगवान राम और माता सीता के साथ भव्य फूलों की होली खेली जा रही है। भक्त से भगवान तक होली खेलने की यह प्राचीन परंपरा है। इसी तरह पूरे देश में होली आनंद पूर्वक मनाई जा रही है।
वहीं जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जनमेजय शरण ने कहा कि पूरी अयोध्या में रंगोत्सव की खुशी में होली खेली जा रही है। यह क्रम रंगभरी एकादशी से शुरू होता है। अयोध्या के संपूर्ण मंदिर में या होली खेली जाती है और संत जन हर्ष और उल्लास के साथ बड़ा भक्तमाल मंदिर में खेली जा रही है। जन्मेजय शर्मा ने कहा कि रंगभरी एकादशी के बाद रंगपंचमी तक यह महा महोत्सव चलता रहेगा।

